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एक तरफ ले रहा दुश्मनी तो दूसरी तरफ भारत से ही मदद मांग रहा बांग्लादेश, फिर हिंदुस्तान के सामने फैलाए हाथ

भारत से रिश्तों में तल्खी के बावजूद बांग्लादेश एक बार फिर बिजली संकट में भारत पर निर्भर होता दिख रहा है। गैस की कमी, बढ़ती मांग और अडानी पावर से बढ़ता बिजली आयात क्या दोनों देशों के रिश्तों की नई तस्वीर दिखाता है? पूरी खबर पढ़ें।

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भारत के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक मंचों पर तीखे आरोप लगाने वाले बांग्लादेश को एक बार फिर उसी भारत की जरूरत पड़ गई है। हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में आई कड़वाहट, वीजा सेवाओं पर अस्थायी रोक और कूटनीतिक तनाव के बावजूद ऊर्जा के मोर्चे पर हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। बांग्लादेश इस समय गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है, जहां प्राकृतिक गैस की कमी और तेजी से बढ़ती बिजली मांग ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में भारत, खासकर अडानी पावर, बांग्लादेश के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आया है। झारखंड के गोड्डा स्थित कोयला आधारित पावर प्लांट से बांग्लादेश को भेजी जा रही बिजली में लगातार इजाफा हो रहा है। यह स्थिति साफ दिखाती है कि राजनीतिक बयान चाहे जितने भी तीखे हों, जमीनी हकीकत में बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतें भारत से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

गोड्डा प्लांट से बढ़ी सप्लाई, आंकड़े बता रहे पूरी कहानी

भारतीय और बांग्लादेशी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तक के तीन महीनों में अडानी पावर से बांग्लादेश को भेजी गई बिजली में सालाना आधार पर करीब 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह सप्लाई बढ़कर लगभग 2.25 बिलियन किलोवाट-घंटे तक पहुंच चुकी है। बांग्लादेश सरकार के अनुसार, भारत से आयात की जा रही बिजली अब उसके कुल पावर मिक्स का रिकॉर्ड 15.6 प्रतिशत हिस्सा बन चुकी है, जबकि साल 2024 में यह आंकड़ा करीब 12 प्रतिशत था। अडानी पावर ने वर्ष 2023 में बांग्लादेश को बिजली की आपूर्ति शुरू की थी और तब से यह सिलसिला लगातार जारी है। खास बात यह है कि यह पूरा व्यापार ऐसे समय में फल-फूल रहा है, जब दोनों देशों के रिश्ते राजनीतिक रूप से सहज नहीं कहे जा सकते। बिजली का यह बढ़ता आयात यह भी दर्शाता है कि बांग्लादेश के पास फिलहाल भारत के अलावा कोई मजबूत और भरोसेमंद विकल्प नहीं है।

महंगी बताई जा रही बिजली, लेकिन मजबूरी भी उतनी ही बड़ी

हालांकि, बांग्लादेश सरकार की ओर से नियुक्त एक समीक्षा पैनल ने भारत से आने वाली बिजली को जरूरत से ज्यादा महंगा करार दिया है। इसके बावजूद ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में यही सबसे व्यावहारिक विकल्प है। ढाका के स्वतंत्र ऊर्जा विशेषज्ञ एजाज हुसैन का कहना है कि अडानी से मिलने वाली बिजली अभी भी तेल से बनने वाली बिजली की तुलना में सस्ती है। गैस की भारी कमी के चलते बांग्लादेश को मजबूरी में तेल से चलने वाले पावर प्लांट्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो लागत के लिहाज से काफी महंगे साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि आलोचनाओं के बावजूद भारत से बिजली आयात जारी है। दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर आम लोगों पर भी दिख रहा है, जहां वीजा सेवाओं पर अस्थायी रोक ने व्यापार, इलाज और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, लेकिन बिजली का लेनदेन इन सब से अलग अपनी ही राह पर चलता दिख रहा है।

गैस संकट, बढ़ती मांग और कोयले की ओर झुकाव

बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन रेजाउल करीम के मुताबिक, देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पावर इम्पोर्ट बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था काफी हद तक प्राकृतिक गैस पर निर्भर है, लेकिन गैस की उपलब्धता लगातार घट रही है। अनुमान है कि साल 2026 में बिजली की मांग 6 से 7 प्रतिशत तक और बढ़ सकती है। इस कमी को पूरा करने के लिए बांग्लादेश सरकार अब कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर भी जोर दे रही है। इसके तहत कोयले के आयात में बड़ा इजाफा किया गया है। एनालिटिक्स फर्म के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में बांग्लादेश का कोयला आयात 35 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 17.34 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया। कुल मिलाकर, बांग्लादेश की ऊर्जा रणनीति यह साफ संकेत देती है कि चाहे राजनीतिक बयानबाजी कुछ भी हो, आने वाले समय में भी भारत उसकी ऊर्जा सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता रहेगा।

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