अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। इस बार अमेरिकी कार्रवाई की आंच भारत तक पहुंची है। अमेरिका ने चंडीगढ़ में रहने वाले एक दंपत्ति और उनसे जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी सरकार का आरोप है कि ये लोग ईरान के प्रतिबंधित तेल कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे थे। बताया गया है कि इस नेटवर्क के जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को फर्जी समुद्री दस्तावेज और पंजीकरण प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए जाते थे। इससे जहाजों की असली पहचान और उनके मालिकाना हक को छिपाने में मदद मिलती थी। खास बात यह है कि यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार नए कदम उठा रहा है। अमेरिकी वित्त विभाग की घोषणा के बाद भारत से जुड़ी कई कंपनियां भी प्रतिबंधों के दायरे में आ गई हैं।
चंडीगढ़ के दंपत्ति पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी वित्त विभाग ने बुधवार को चंडीगढ़ निवासी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद के खिलाफ प्रतिबंधों की घोषणा की। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि दोनों एक ऐसे नेटवर्क से जुड़े थे, जो ईरान के तेल निर्यात में इस्तेमाल होने वाले जहाजों को फर्जी समुद्री पंजीकरण और प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराता था। दरअसल, अमेरिका समेत कई देशों ने ईरान के तेल कारोबार पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसे में ईरान से तेल खरीदने और उसे दूसरे देशों तक पहुंचाने के लिए कथित तौर पर अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। अमेरिकी विभाग का दावा है कि इस दंपत्ति से जुड़ा नेटवर्क जहाजों की पहचान और उनके वास्तविक मालिकों की जानकारी छिपाने में मदद करता था। इससे प्रतिबंधों से बचकर तेल की ढुलाई करना आसान हो जाता था। हालांकि, ये सभी आरोप अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से साबित हुआ तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
दो अन्य भारतीय नागरिकों समेत नौ कंपनियां भी प्रतिबंधों की सूची में
इस कार्रवाई का दायरा केवल एक दंपत्ति तक सीमित नहीं है। अमेरिकी सरकार ने दो अन्य भारतीय नागरिकों अश्वनी कुमार धीमान और ईश्वरविंदर सिंह पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। आरोप है कि ये दोनों सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी से संबंधित कंपनियों में निदेशक के पद पर शामिल थे। इसके अलावा भारत से जुड़ी कुल नौ व्यावसायिक इकाइयों को भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका ईरान के तेल परिवहन नेटवर्क में रही है। इसी कार्रवाई के तहत तुर्की की कंपनी फ्यूगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी शिकंजा कसा गया है। अमेरिका का आरोप है कि इस कंपनी ने प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को हवाई अड्डों पर ग्राउंड हैंडलिंग और दूसरी जरूरी सेवाएं दी थीं। जिन छह एयरलाइंस का नाम सामने आया है, उनमें ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, सेपेहरान एयरलाइंस, वारेश एयरलाइंस, तबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं।
क्या है ईरान का शैडो फ्लीट, जिसके जरिए तेल पहुंचाने का आरोप लगा?
अमेरिका की इस कार्रवाई में सबसे अहम नाम ईरान के शैडो फ्लीट का है। दरअसल, शैडो फ्लीट ऐसे जहाजों के नेटवर्क को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचते हुए तेल और अन्य सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि भारत से जुड़ा नेटवर्क ऐसे ही जहाजों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद कर रहा था। इन दस्तावेजों के जरिए जहाजों की पहचान, पंजीकरण और वास्तविक मालिकाना जानकारी छिपाई जाती थी। वाशिंगटन का यह भी आरोप है कि इस बेड़े के कुछ जहाज ईरानी सेना और उससे जुड़े सहयोगी संगठनों के लिए काम करते थे। अमेरिका के मुताबिक, इस तरह के नेटवर्क से ईरान को तेल बेचकर पैसा जुटाने में मदद मिलती है, जिसका इस्तेमाल उसकी सैन्य और दूसरी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रहा है।
ट्रंप के ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत कार्रवाई
अमेरिका ने इस पूरी कार्रवाई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ से जोड़ा है। इस अभियान का मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई को सीमित करना और उसकी आर्थिक ताकत पर दबाव बनाना है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने ईरान की मदद करने वाले लोगों और कारोबारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई जारी रखेगा, चाहे उनकी गतिविधियां जमीन, समुद्र या हवाई रास्ते से संचालित हो रही हों। अमेरिकी प्रशासन का संदेश साफ है कि ईरान के प्रतिबंधित कारोबार में शामिल पाए जाने वाले लोगों और कंपनियों को बख्शा नहीं जाएगा। अब इस कार्रवाई के बाद भारत से जुड़ी कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों का क्या असर पड़ेगा और क्या इस मामले में आगे भी नए नाम सामने आएंगे, इस पर नजर रहेगी।
