महाराष्ट्र के नवी मुंबई से चिकित्सा जगत का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने सुबह दांत साफ करते समय गलती से पूरा टूथब्रश ही निगल लिया। घटना के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई और परिवार के लोग भी घबरा गए। मामला इतना गंभीर था कि टूथब्रश उनके पेट तक पहुंच चुका था। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए नवी मुंबई के मेडिकवर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से ऐसा कमाल किया कि मरीज को बिना किसी बड़े ऑपरेशन के नई जिंदगी मिल गई। सबसे खास बात यह रही कि डॉक्टरों ने पेट में फंसे पूरे टूथब्रश को महज 30 मिनट की एंडोस्कोपी प्रक्रिया के जरिए बाहर निकाल लिया। सफल इलाज के कुछ ही घंटों बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई।
अचानक गले से नीचे चला गया पूरा टूथब्रश
जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र के पेन इलाके में रहने वाले 50 वर्षीय राजेंद्र मालुसरे ऑटो रिक्शा चलाते हैं। उनकी सुबह भी आम दिनों की तरह शुरू हुई थी। वह रोजाना की तरह दांत साफ करने के लिए टूथब्रश का इस्तेमाल कर रहे थे। इसी दौरान अचानक ब्रश उनके हाथ से फिसल गया और देखते ही देखते गले के रास्ते पेट में चला गया। यह घटना इतनी अचानक हुई कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। पूरा टूथब्रश निगल लेने के बाद उनकी परेशानी बढ़ने लगी। आमतौर पर छोटी चीज निगलने पर लोग उसे मामूली घटना समझ सकते हैं, लेकिन टूथब्रश जैसी लंबी और सख्त वस्तु का पेट में पहुंचना बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। राजेंद्र को भी जल्द ही समझ आ गया कि मामला सामान्य नहीं है। इसके बाद उन्होंने बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क किया और इलाज की प्रक्रिया शुरू हुई।
एक्स-रे में नहीं दिखा टूथब्रश, फिर डॉक्टरों ने कैसे पकड़ी परेशानी?
घटना के बाद राजेंद्र सबसे पहले स्थानीय डॉक्टर के पास पहुंचे। वहां चिकित्सक ने उनकी स्थिति को देखते हुए एक्स-रे कराने की सलाह दी। हालांकि, जांच में टूथब्रश की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। इसकी वजह यह थी कि टूथब्रश मुख्य रूप से प्लास्टिक और फाइबर जैसी सामग्री से बना होता है, जो सामान्य एक्स-रे में साफ दिखाई नहीं देता। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो गया कि टूथब्रश शरीर के किस हिस्से में फंसा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीज की जांच की और एंडोस्कोपी करने का फैसला लिया। इस प्रक्रिया के जरिए डॉक्टरों ने पाचन तंत्र के अंदर की स्थिति को देखा। जांच में पता चला कि पूरा टूथब्रश राजेंद्र के पेट में मौजूद था। इसके बाद डॉक्टरों ने बिना देरी किए उसे निकालने की तैयारी शुरू कर दी।
बिना चीरा लगाए 30 मिनट में निकाला पूरा टूथब्रश
मेडिकवर अस्पताल में इस चुनौतीपूर्ण मामले की जिम्मेदारी सीनियर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट और थेराप्यूटिक एंडोस्कोपिस्ट डॉ. रावसाहेब राठौड़ ने संभाली। उन्होंने अपनी मेडिकल टीम के साथ मिलकर मरीज का इलाज शुरू किया। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पेट में फंसे लंबे टूथब्रश को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की थी। यदि इसे निकालने में लापरवाही होती तो पाचन तंत्र के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता था। इसलिए डॉक्टरों ने सामान्य सर्जरी के बजाय एडवांस एंडोस्कोपी तकनीक का सहारा लिया। इस प्रक्रिया में विशेष उपकरणों की मदद से शरीर के अंदर मौजूद वस्तु को बाहर निकाला जाता है। डॉक्टरों की टीम ने करीब 30 मिनट तक सावधानीपूर्वक प्रक्रिया पूरी की और आखिरकार पूरा टूथब्रश सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान मरीज के पेट पर कोई चीरा नहीं लगाया गया।
डॉक्टरों की सूझबूझ ने बचाई जान
टूथब्रश बाहर निकलने के बाद राजेंद्र मालुसरे और उनके परिवार ने राहत की सांस ली। सबसे अच्छी बात यह रही कि प्रक्रिया सफल रहने के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और उन्हें कुछ ही घंटों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस मामले ने एक बार फिर साबित किया कि आपात स्थिति में सही समय पर विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचना कितना जरूरी होता है। टूथब्रश जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीज भी अगर गलती से निगल ली जाए तो गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
