अमेरिका में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है, क्योंकि देश के सबसे अहम मिड-टर्म चुनावों के लिए विभिन्न राज्यों में मतदान तेजी से चल रहा है। इस चुनाव को मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के लिए एक बड़ा लिटमस टेस्ट यानी जनमत संग्रह माना जा रहा है। ट्रंप के इस कार्यकाल के दौरान ईरान के साथ तनावपूर्ण युद्ध के हालात, आसमान छूती महंगाई, अंतरराष्ट्रीय व्यापार युद्ध और अमेरिकी समाज में बढ़ते गहरे वैचारिक मतभेदों ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में यह चुनाव तय करेगा कि आने वाले समय में अमेरिकी संसद और राजनीति में ट्रंप का प्रभाव और रुतबा कायम रहता है या फिर उन्हें तगड़ा झटका लगता है।
ट्रंप का बड़ा आरोप: अलास्का सीनेट चुनाव को बताया ‘धोखाधड़ी’
मतदान के बीच राजनीतिक घमासान तब और तेज हो गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक टेलीफोन इंटरव्यू में अलास्का सीनेट चुनाव को सीधे तौर पर ‘पूरी तरह से धोखाधड़ी’ करार दिया। ट्रंप ने पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार मैरी पेल्टोला के चुनाव अभियान और खुद डेमोक्रेटिक पार्टी ने बैलेट पेपर पर एक ‘स्पॉइलर’ उम्मीदवार को उतारने और उसे शामिल कराने में गुप्त रूप से मदद की थी। उनके इस तीखे बयान के बाद से राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे चुनावी सरगर्मी और ज्यादा बढ़ गई है।
महंगाई और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जनता की पैनी नजर
मौजूदा मिड-टर्म चुनावों में अमेरिकी मतदाता केवल स्थानीय मुद्दों पर ही वोट नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे व्हाइट हाउस की नीतियों का कड़ा मूल्यांकन कर रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल में घरेलू मोर्चे पर बढ़ती महंगाई ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है, तो वहीं वैश्विक स्तर पर ईरान के साथ उपजे तनाव और कड़े व्यापार युद्ध ने अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता के दौर में ला खड़ा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यही वो ज्वलनशील मुद्दे हैं जो तय करेंगे कि मतदाता ट्रंप प्रशासन की नीतियों के पक्ष में खड़े होते हैं या फिर बदलाव के समर्थन में अपना जनादेश देते हैं।
संसद पर नियंत्रण की लड़ाई और राजनीतिक भविष्य का फैसला
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों का नियंत्रण हासिल करने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। यदि ट्रंप समर्थित उम्मीदवार इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तो राष्ट्रपति का एजेंडा और मजबूत होगा। इसके विपरीत, यदि डेमोक्रेटिक पार्टी बाजी मारने में सफल रही, तो ट्रंप के बाकी बचे कार्यकाल में उनके लिए नीतिगत फैसले लेना बेहद मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिका के इन परिणामों पर टिकी हैं, जो अमेरिकी राजनीति के साथ-साथ वैश्विक समीकरणों की दिशा भी तय करेंगे।
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