महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अजित पवार गुट के छह वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक के बाद राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि नेताओं ने महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय का जिम्मा फिर से NCP को सौंपने का मुद्दा उठाया है। हालांकि, इस मुलाकात में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की मौजूदगी नहीं रही। यही बात अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत कर रहे थे, तो दूसरी तरफ दोनों महत्वपूर्ण चेहरों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और आगे की रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे NCP के छह बड़े चेहरे
दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करने वाले नेताओं में NCP के कई अनुभवी और प्रभावशाली चेहरे शामिल रहे। इनमें प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे, हसन मुश्रीफ और दिलीप वळसे पाटील के नाम शामिल हैं। इन सभी नेताओं की एक साथ केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात को महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, बैठक में राज्य सरकार के भीतर NCP की भूमिका और वित्त मंत्रालय को लेकर बातचीत हुई। पार्टी की ओर से वित्त विभाग दोबारा मिलने की मांग उठाए जाने की चर्चा है। हालांकि, मुलाकात में हुई बातचीत का पूरा आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महायुति सरकार के भीतर इस मुलाकात का क्या असर पड़ता है और NCP की मांग पर बीजेपी का रुख क्या रहता है।
सुनेत्रा और पार्थ पवार क्यों नहीं पहुंचे दिल्ली? उठने लगे सवाल
इस पूरी राजनीतिक गतिविधि में सबसे ज्यादा चर्चा सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। पार्टी के छह वरिष्ठ नेता अमित शाह से मुलाकात करने पहुंचे, लेकिन इन दोनों नेताओं का बैठक में शामिल नहीं होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी के अंदर चल रही रणनीतिक चर्चाओं से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति के पीछे कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे पार्टी में मतभेद या नेतृत्व को लेकर किसी विवाद का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। इसी बीच मुंबई में सुनेत्रा पवार के सरकारी आवास देवगिरी पर शाम चार बजे NCP कोर कमेटी की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इसमें पार्टी के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठन की दिशा और आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
MLC चुनाव के नतीजों ने भी बढ़ाई महायुति की चिंता
महाराष्ट्र की राजनीति में NCP की इस सक्रियता के बीच हाल ही में विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव परिणाम भी चर्चा में हैं। इन चुनावों में महाविकास आघाड़ी (MVA) ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सत्ताधारी महायुति को दो सीटें मिलीं। नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को हराकर बड़ा उलटफेर किया। पुणे स्नातक सीट पर शरद पवार गुट की उम्मीदवार ने जीत हासिल की, जबकि छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर MVA समर्थित डॉ. प्रतापसिंह पाटिल विजयी रहे। वहीं, पुणे शिक्षक सीट बीजेपी के कौस्तुभ गावड़े और अमरावती शिक्षक सीट शिवसेना (शिंदे गुट) के किरण सरनाईक के खाते में गई। इन नतीजों ने महायुति के सामने राजनीतिक चुनौतियों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। अब अमित शाह से NCP नेताओं की मुलाकात और देवगिरी में होने वाली कोर कमेटी की बैठक के बाद यह साफ हो सकता है कि पार्टी महाराष्ट्र की सत्ता में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कौन सा कदम उठाती है।
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