जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की पत्रकार निधि राजदान के साथ शादी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बरेली के ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने इस विवाह पर आपत्ति जताते हुए फतवा जारी किया है। मौलाना ने अपने बयान में इस शादी को इस्लामी मान्यताओं के अनुसार जायज नहीं बताया है। उनके इस बयान के बाद उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान की शादी चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, यह मौलाना की धार्मिक व्याख्या और उनका व्यक्तिगत बयान है।
मौलाना ने बताई शादी को नाजायज कहने की वजह
मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी का कहना है कि इस्लाम में विवाह के लिए कुछ धार्मिक नियम निर्धारित हैं। उनके मुताबिक, मुस्लिम पुरुष और महिला के बीच निकाह को लेकर इस्लामी शर्तें लागू होती हैं। मौलाना ने दावा किया कि उमर अब्दुल्ला मुस्लिम हैं, जबकि निधि राजदान गैर-मुस्लिम हैं। इसी आधार पर उन्होंने दोनों के विवाह को इस्लामी नजरिए से अनुचित बताया। मौलाना का कहना है कि ऐसी स्थिति में इस शादी को जायज नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
A new journey began yesterday 💍@Nidhi https://t.co/BXbdLq2d1H
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) October 31, 2026
निधि राजदान के धर्म परिवर्तन को लेकर भी कही बात
मौलाना ने अपने बयान में यह भी कहा कि उमर अब्दुल्ला को शादी से पहले निधि राजदान को इस्लाम कबूल करवाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार, निधि के इस्लाम स्वीकार करने और कलमा पढ़ने के बाद ही यह विवाह धार्मिक रूप से जायज हो सकता था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है कि निधि राजदान ने धर्म परिवर्तन किया है। इस मामले में मौलाना की टिप्पणी को उनके धार्मिक दृष्टिकोण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पोस्ट से सामने आई शादी की जानकारी
उमर अब्दुल्ला ने 31 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर निधि राजदान के साथ तस्वीरें साझा कर अपनी शादी की जानकारी दी थी। उन्होंने पोस्ट में नए सफर की शुरुआत का जिक्र किया। निधि राजदान ने भी सोशल मीडिया के जरिए विवाह की पुष्टि की। बताया गया कि इस निजी समारोह में दोनों परिवारों के करीबी लोग शामिल हुए। दोनों की यह दूसरी शादी है। इससे पहले उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के बीच तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी हुई थी। अब शादी की घोषणा के बाद मौलाना के फतवे ने इस मामले को एक नई चर्चा में ला दिया है।
