चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर हाल ही में संपन्न हुए चुनाव के परिणाम भले ही कागजों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बड़ी जीत का संदेश देते हों, लेकिन इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ ने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है। (BJP) ने कुल 13 सीटों पर अपना परचम लहराया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्य गढ़ नागपुर में मिली करारी हार ने पार्टी के भीतर गंभीर आत्ममंथन का दौर शुरू कर दिया है। इसके विपरीत, मात्र एक सीट जीतने के बावजूद कांग्रेस और विपक्षी दल इन परिणामों को अपनी वैचारिक जीत बताकर आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं, जिससे देश की राजनीति में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है।
वाराणसी और नागपुर के नतीजों ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की कुल 28 विधान परिषद सीटों पर हुए इन चुनावों में BJP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, फिर भी प्रधानमंत्री के अपने गृह क्षेत्र वाराणसी में दोनों एमएलसी सीटों पर पार्टी की हार ने सबको चौंका दिया है। इसी तरह, महाराष्ट्र के नागपुर में कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज कर BJP को बड़ा झटका दिया है। नागपुर न केवल आरएसएस का मुख्यालय है, बल्कि यह उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह जिला भी है। इन दो प्रमुख सीटों पर हार ने बीजेपी की रणनीतिक कमजोरियों को उजागर कर दिया है, जिस पर विपक्षी दलों ने करारा प्रहार करना शुरू कर दिया है।
विपक्ष का तीखा हमला और सहयोगी दलों के बीच आंतरिक कलह
परिणाम सामने आने के बाद से ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल BJP पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को दूसरों पर प्रवचन देने के बजाय अपने ही गढ़ वाराणसी और नागपुर में हार के कारणों पर विचार करना चाहिए। वहीं, महाराष्ट्र में भी इन नतीजों के बाद महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान शुरू हो गई है। बीजेपी ने खराब प्रदर्शन के लिए अपने सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) पर अपेक्षित सहयोग न करने का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, एनसीपी (अजित पवार) ने भी अपनी हार स्वीकार करते हुए आत्ममंथन की बात कही है, जिससे गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी साफ झलकती है।
बिहार और कर्नाटक में मिले-जुले रुझान, भविष्य की राजनीति के संकेत
बिहार और कर्नाटक के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो वहां भी राजनीतिक समीकरणों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिले हैं। बिहार में BJP ने तीन सीटें जीतीं, लेकिन उसके सहयोगी दल जेडीयू को भारी झटका लगा है, जबकि आरजेडी और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। कर्नाटक में BJP ने चार में से तीन सीटों पर कब्जा जमाया, लेकिन सत्तारूढ़ कांग्रेस को मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र में सीट गंवानी पड़ी। कुल मिलाकर, स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि भले ही संख्या बल के आधार पर बीजेपी आगे हो, लेकिन जमीन पर मतदाताओं की नब्ज और क्षेत्रीय समीकरणों में बड़े बदलाव हो रहे हैं जो आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय करेंगे।
