मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में नया घटनाक्रम सामने आया है। सौरभ हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए मुस्कान और साहिल ने अपनी सजा को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है। इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि दोनों की ओर से अपील की पैरवी एक ही वकील कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस वकील को साहिल के परिवार ने नियुक्त किया है और उसी के माध्यम से मुस्कान की ओर से भी अपील दाखिल की गई है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या साहिल के परिजनों ने मुस्कान के प्रति अपना रुख बदल लिया है? हालांकि, केवल एक वकील के दोनों की पैरवी करने से यह साबित नहीं होता कि परिवार ने मुस्कान को स्वीकार कर लिया है। इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पहले अलग-अलग वकील कर रहे थे दोनों का बचाव
यह मामला सौरभ की हत्या से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान दोनों की ओर से अलग-अलग वकील पैरवी कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, मुस्कान के परिवार ने उससे दूरी बना ली थी। इसके बाद उसने कानूनी सहायता की मांग की, जिसके आधार पर उसे सरकारी वकील उपलब्ध कराया गया था। दूसरी ओर, साहिल की पैरवी उसके परिजनों की ओर से नियुक्त वकील कर रहा था। अब मृत्युदंड के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील के दौरान दोनों का एक ही वकील होना चर्चा का विषय बन गया है। इस बदलाव के पीछे क्या वजह है, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।
मुस्कान की बेटी को लेकर भी उठ रहे सवाल
इस मामले में मुस्कान की बेटी के भविष्य और उसकी देखभाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि क्या साहिल के परिजन बच्ची को अपने साथ रखने की जिम्मेदारी उठाएंगे। मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, बच्ची को किसके पास सौंपा जाए, इस प्रक्रिया में मुस्कान की इच्छा अहम होगी। यदि साहिल के परिजन बच्ची की परवरिश करना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए जेल प्रशासन को लिखित प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके बाद इस संबंध में मुस्कान की राय ली जाएगी। यानी बच्ची को सौंपने का फैसला केवल परिवार की इच्छा के आधार पर नहीं होगा, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी करना होगा। फिलहाल, साहिल के परिवार की ओर से बच्ची की जिम्मेदारी लेने को लेकर किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या मुस्कान और बच्ची को अपनाएगा साहिल का परिवार?
नीला ड्रम हत्याकांड में अब दो सवाल प्रमुखता से चर्चा में हैं। पहला, मृत्युदंड के खिलाफ अपील में मुस्कान और साहिल की पैरवी एक ही वकील क्यों कर रहा है? दूसरा, क्या साहिल का परिवार मुस्कान और उसकी बेटी को स्वीकार करने के लिए तैयार है? फिलहाल उपलब्ध जानकारी से दूसरे सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। एक ही वकील का दोनों की ओर से पैरवी करना अपने आप में पारिवारिक रिश्तों में बदलाव का प्रमाण नहीं है। वहीं, बच्ची की देखभाल के मामले में जेल प्रशासन के अनुसार आगे की प्रक्रिया मुस्कान की इच्छा और संबंधित औपचारिकताओं के आधार पर चलेगी। अब हाईकोर्ट में दोनों की अपील पर आगे क्या होता है और बच्ची के भविष्य को लेकर क्या निर्णय सामने आता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
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