बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह के बयान से हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से निकाले जाने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उसके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने दावा किया कि आगामी चुनाव में JDU को 10 सीटें मिलना भी बड़ी बात होगी। पार्टी की स्थिति को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि चुनाव आने दीजिए, सब कुछ साफ हो जाएगा। अनंत सिंह के इस बयान ने बिहार की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी से बाहर किए जाने के बाद उनके तेवर से साफ है कि वह इस कार्रवाई से पीछे हटने के बजाय खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।
क्या अपनी नई पार्टी बनाएंगे अनंत सिंह?
JDU से निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने अपनी राजनीतिक रणनीति को लेकर भी संकेत दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह अब अपनी पार्टी बनाएंगे। हालांकि, उन्होंने नई पार्टी के नाम, गठन की तारीख या आगे की रणनीति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि वह वास्तव में नया राजनीतिक दल बनाते हैं या किसी दूसरे विकल्प पर विचार करते हैं। अनंत सिंह के इस रुख से बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें लगाई जा रही हैं। उनके अगले कदम पर विपक्षी दलों की भी नजर रहेगी।
कांग्रेस ने निष्कासन को बताया NDA की रणनीति
अनंत सिंह को JDU से निकाले जाने के फैसले पर बिहार कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता स्नेहाशीष वर्धन ने आरोप लगाया कि पूरे चुनाव के दौरान अनंत सिंह JDU उम्मीदवार के खिलाफ बयान देते रहे, लेकिन उस समय उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस का दावा है कि ललन सिंह को पहचानने से इनकार करने के बाद ही पार्टी ने कदम उठाया। वर्धन ने इस घटनाक्रम को BJP और NDA की रणनीति बताते हुए सवाल उठाए कि कार्रवाई चुनाव के बाद ही क्यों की गई। हालांकि, यह कांग्रेस प्रवक्ता का आरोप है।
JDU के फैसले का समर्थन, नीतीश कुमार और संजय झा की तारीफ
वहीं, बिहार के पूर्व मंत्री अभिराम शर्मा ने अनंत सिंह को पार्टी से निकालने के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने JDU नेतृत्व की सराहना करते हुए नीतीश कुमार और संजय झा के प्रति आभार जताया। इस तरह अनंत सिंह के निष्कासन को लेकर बिहार में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह अपनी नई पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरेंगे और क्या उनके दावे JDU के लिए चुनौती बनेंगे? इसका जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों से ही मिलेगा।
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