हरियाणा के रोहतक जिले के रिटोली गांव से जुड़ा गैंगस्टर हिमांशु भाऊ देश के चर्चित वांछित अपराधियों में शामिल रहा है। उसे कई जगहों पर हिमांशु रिटोली और छोटा डॉन के नाम से भी जाना जाता है। पुलिस रिकॉर्ड और सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, उसने कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था। धीरे-धीरे उस पर हत्या, हत्या की कोशिश और रंगदारी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप लगे। हरियाणा और दिल्ली में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आती रही है। उसकी गतिविधियों के कारण सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं। हालांकि, किसी भी मामले में आरोप और दोषसिद्धि अलग-अलग बातें हैं। हिमांशु भाऊ का नाम जिन घटनाओं से जोड़ा गया, उनकी सच्चाई का निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से क्यों है दुश्मनी?
हिमांशु भाऊ और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बीच दुश्मनी की चर्चा अपराध जगत से जुड़ी खबरों में लंबे समय से होती रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, हिमांशु भाऊ का संबंध नीरज बवाना और बंबीहा गिरोह से जुड़े लोगों के साथ बताया गया है। इन गिरोहों और बिश्नोई गैंग के बीच टकराव की खबरें भी सामने आती रही हैं। इस आपसी दुश्मनी के पीछे वर्चस्व, आपराधिक नेटवर्क और रंगदारी जैसे मुद्दों को अहम माना जाता है। हालांकि, गिरोहों के बीच संबंध और किसी वारदात के पीछे की वास्तविक वजह का पता जांच एजेंसियों की पड़ताल से ही चलता है। हिमांशु भाऊ पर हरियाणा में कई आपराधिक मामलों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। उसकी गतिविधियों को लेकर पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करती रही हैं।
एल्विश यादव के घर फायरिंग से लेकर बर्गर किंग हत्याकांड तक चर्चा में आया नाम
हिमांशु भाऊ का नाम कई चर्चित आपराधिक घटनाओं के सिलसिले में सामने आया है। इनमें गुरुग्राम में यूट्यूबर एल्विश यादव के घर के बाहर हुई फायरिंग भी शामिल है। इस घटना के बाद मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हिमांशु भाऊ के गिरोह ने इस वारदात की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। इसके अलावा दिल्ली के बर्गर किंग आउटलेट में हुई हत्या और जिम संचालकों से रंगदारी मांगने से जुड़े मामलों में भी उसके नाम की चर्चा हुई। पुलिस और जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में आरोपियों की भूमिका तथा आपसी संबंधों की जांच करती हैं। किसी गिरोह की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए जांच में मिले साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं।
विदेश भागने के बाद भी तलाश जारी
हिमांशु भाऊ की तलाश के दौरान उसके विदेश में होने की खबरें भी सामने आई थीं। रिपोर्टों में बताया गया कि वह पहले पुर्तगाल गया और बाद में अमेरिका में रहकर अपने गिरोह की गतिविधियां संचालित करने के आरोपों से जुड़ा रहा। साल 2023 में उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की जानकारी भी सामने आई थी। इसके अलावा भारतीय एजेंसियों ने उसकी तलाश के लिए लुकआउट सर्कुलर जैसी कार्रवाई की थी। उपलब्ध कराए गए विवरण के मुताबिक, अब अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई है। यदि गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो भारतीय एजेंसियां उससे जुड़े मामलों में पूछताछ कर सकती हैं।
