आशुतोष रांका और सौरव दास को जमानत मिलने के बाद CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह (Ratna Singh) ने राहत जताई है। दोनों की रिहाई के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें बीते सात दिनों के घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी। रत्ना सिंह ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में जो कुछ हुआ, उसे कानूनी नजरिए से सही ठहराना आसान नहीं है। उनका मानना है कि मामले पर करीब से काम करने वाले वकील भी इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठा सकते हैं। रत्ना सिंह (Ratna Singh) इस दौरान दोनों की न्यायिक हिरासत से जुड़ी जानकारी साझा कर रही थीं। उनकी पोस्ट सामने आने के बाद इस मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
रत्ना सिंह ने वकीलों की टीम को दिया धन्यवाद
अपनी पोस्ट में रत्ना सिंह (Ratna Singh) ने उन वकीलों का आभार जताया, जिन्होंने आशुतोष रांका और सौरव दास को कानूनी सहायता देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एडवोकेट अभिक चिमनी और उनकी टीम के सदस्यों प्रांजल अब्रोल, मोक्षा शर्मा और कार्तिक वेणु को धन्यवाद दिया। इसके अलावा उन्होंने एडवोकेट अभिष्ट हेला, पुष्प शर्मा और अंगद के योगदान की भी सराहना की। रत्ना सिंह (Ratna Singh) के मुताबिक, इन वकीलों ने शुरुआत से ही मामले की कानूनी प्रक्रिया में सहयोग किया। उन्होंने एडवोकेट शिवांगी शर्मा का भी विशेष रूप से जिक्र किया, जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया। साथ ही, उन्होंने अपने वरिष्ठ वकीलों और उनकी टीमों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनसे उन्हें जरूरी कानूनी सलाह और मार्गदर्शन मिला।
What has happened over the past seven days cannot be justified on legal grounds.
I can say that, the lawyers who have worked closely on the matter can say that, and anyone thinking rationally can see it.
— Ratna Singh (@whattalawyer) October 22, 2026
पहले पांच दिन की हिरासत, फिर दो दिन बढ़ी अवधि
आशुतोष रांका और सौरव दास को शुरुआत में एसईएम की ओर से पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में उनकी हिरासत की अवधि दो दिन और बढ़ा दी गई। इस तरह दोनों को सात दिन बाद जमानत पर रिहा किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जमानत के लिए उन्हें शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने और 50 हजार रुपये के मुचलके की शर्त पूरी करनी पड़ी। रिहाई के बाद रत्ना सिंह (Ratna Singh) की प्रतिक्रिया ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम और कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित अदालती आदेश और मामले के आधिकारिक विवरण को देखना जरूरी है।
Read More-तिहाड़ से रिहा होते ही कौन सा नया राज खुला? CJP नेताओं के बाहर आते ही क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन!
