कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत के बाद अभिनेता प्रकाश राज (Prakash Raj) ने इस मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने वीडियो जारी कर सवाल उठाया कि विरोध प्रदर्शन न करने का लिखित भरोसा लेकर नेताओं को रिहा करने की प्रक्रिया आखिर क्यों अपनाई गई। प्रकाश राज के मुताबिक, इस तरह की शर्तों से प्रदर्शनकारियों पर अपनी आवाज दबाने का दबाव बन सकता है। उन्होंने कहा कि देश के युवा इन घटनाओं को देख रहे हैं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस बयान के बाद सौरव और आशुतोष की रिहाई का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के मामले में कैसे हुई गिरफ्तारी?
मामला 13 अक्टूबर का है, जब सौरव दास और आशुतोष रांका दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे। दोनों ने वहां प्रदर्शन स्थल से जुड़ी पाबंदियों का विरोध करते हुए बंद गेट पार किया और राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि उनकी इस कार्रवाई से पहले दिए गए शांति बनाए रखने के आश्वासन का उल्लंघन हुआ। इससे पहले भी दोनों नेताओं को हिरासत में लिया गया था और उनसे पीस बॉन्ड भरवाया गया था। इस कार्रवाई को लेकर प्रकाश राज (Prakash Raj) ने पहले भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की मांग को लेकर नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई पर जवाब मिलना चाहिए। हालांकि, मामले में पुलिस और अदालत की प्रक्रिया अपनी जगह जारी है।
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— Prakash Raj (@prakashraaj) October 22, 2026
50-50 हजार के बॉन्ड पर मिली जमानत, आगे क्या होगा?
21 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने सौरव दास और आशुतोष रांका ने लिखित भरोसा दिया कि वे जंतर-मंतर पर किसी तरह का प्रदर्शन आयोजित नहीं करेंगे। इसके बाद दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया गया। हालांकि, उनकी रिहाई का मतलब यह नहीं है कि मामला खत्म हो गया है। जांच अभी जारी है और दोनों नेताओं को आगे की कानूनी प्रक्रिया में शामिल होना होगा। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाया है। वहीं, प्रकाश राज (Prakash Raj) ने अपने वीडियो में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि युवा फिर एकजुट हो सकते हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग का भी जिक्र किया। अब इस मामले में आगे की सुनवाई और पुलिस जांच पर नजर रहेगी।
