उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब संगठन की मजबूती और जमीनी हालात का जायजा लेने में जुट गई है। इसी कड़ी में बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे। यहां उन्होंने प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ बंद कमरे में बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। पार्टी ने चार सह प्रभारियों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है। अब इन नेताओं के जरिए संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की स्थिति और जनता के बीच पार्टी की पकड़ का फीडबैक जुटाया जाएगा।
मिशन 2027 के लिए चार नेताओं को मिली जिम्मेदारी
BJP ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने के लिए अपने सह प्रभारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया है। राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा को अवध और गोरखपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। राष्ट्रीय मंत्री जगदीश भाई पटेल वाराणसी और कानपुर क्षेत्र में संगठन का जायजा लेंगे। वहीं, अनंत ओझा को ब्रज और पश्चिम क्षेत्र का प्रभार सौंपा गया है। मेधा कुलकर्णी लखनऊ में रहकर पार्टी के चुनावी अभियान, कार्यक्रमों और संगठन से जुड़ी गतिविधियों के बीच तालमेल बनाने का काम देखेंगी। इन नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर संगठन की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाने को कहा गया है।
बंद कमरे में बैठक, जमीनी फीडबैक पर रहेगा जोर
लखनऊ में विनोद तावड़े और धर्मपाल सिंह के बीच हुई बैठक में आगामी चुनाव और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही विधान परिषद चुनाव को लेकर भी मंथन किए जाने की जानकारी है। सह प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और संघ परिवार से जुड़े संगठनों के साथ संवाद करें। इस दौरान क्षेत्रवार संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भूमिका और चुनावी तैयारियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। पार्टी का जोर केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर स्थिति समझने पर है, ताकि चुनाव से पहले जरूरी बदलाव किए जा सकें।
ब्रज क्षेत्र में भी संगठन को मजबूत करने की तैयारी
BJP ने ब्रज क्षेत्र में अभय गिरि को संगठन से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी की कोशिश है कि चुनावी अभियान शुरू होने से पहले संगठन के अलग-अलग स्तरों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाए। सह प्रभारियों की क्षेत्रवार तैनाती को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि, चुनाव में अभी समय है, लेकिन बीजेपी की संगठनात्मक गतिविधियों से साफ है कि पार्टी पहले से तैयारी में जुटना चाहती है। अब देखना होगा कि क्षेत्रीय फीडबैक के आधार पर पार्टी अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है और इन जिम्मेदारियों का चुनावी तैयारियों पर क्या असर पड़ता है।
