देश की राजधानी दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के दौरान राजनीति गरमाई हुई है। इस प्रदर्शन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें विपक्षी नेताओं का जोश और संघर्ष साफ देखा जा सकता है। इन सबके बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। यह वीडियो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़ा है, जिसमें वह हिरासत में ली जाने के बाद पुलिसकर्मियों के साथ उलझती हुई नजर आ रही हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
कंचन गुप्ता का तीखा हमला: “उम्मीद है पीड़िता ने लगवा ली होगी वैक्सीन”
भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने इस वायरल वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए महुआ मोइत्रा के व्यवहार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि लिबरल-लेफ्ट हलकों की चहेती ‘गुस्सैल महुआ’ ने ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिसकर्मी को दांत काट लिया। कंचन गुप्ता ने इसे किसी भी ‘माननीय’ सांसद के लिए बेहद अशोभनीय और पागलपन भरा बर्ताव करार दिया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए यह भी कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस अजीबोगरीब हमले का शिकार बनी पुलिसकर्मी ने समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवा ली होगी।
महुआ मोइत्रा ने खुद शेयर किया वीडियो, दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
विवादों के बीच खुद टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस वीडियो को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर शेयर किया है। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में लिखा कि वे बार-बार वापस लौटेंगे और विरोध जारी रखेंगे। महुआ मोइत्रा ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर बदसलूकी के आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन बस में बैठाया और किंग्सवे कैंप ले जाया गया। उन्होंने जनता से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अंग्रेजों को अदालतों में नहीं बल्कि सड़कों पर उतरकर भगाया गया था, और अब समय आ गया है कि देशवासी सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराएं।
राजनीतिक हलचल और आगे की स्थिति
महुआ मोइत्रा के इस आक्रामक रुख और पुलिसकर्मी को काटने के वायरल वीडियो ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष और प्रशासनिक अधिकारी इस तरह के हिंसक और अमर्यादित आचरण की आलोचना कर रहे हैं, वहीं टीएमसी सांसद और उनके समर्थक इसे पुलिस तंत्र की ज्यादती और दमनकारी कार्रवाई बता रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था और नेताओं के आचार-संव्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी पारा और चढ़ने की पूरी उम्मीद है।
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