त्रिपुरा के जनजातीय इलाकों में हुए ग्राम समिति चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। BJP के नेतृत्व वाले एनडीए ने इन चुनावों में बड़ी जीत का दावा किया है। खास बात यह है कि यह चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराया गया था। नतीजे सामने आने के बाद BJP ने इसे जनता के भरोसे का संकेत बताया और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी को भी घेरा।
587 ग्राम समितियों में हुआ था चुनाव, 81 फीसदी मतदान
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के छठी अनुसूची वाले इलाकों में 28 सितंबर को ग्राम समिति चुनाव के लिए मतदान हुआ था। कुल 587 ग्राम समितियों की 4,597 सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया हुई। चुनाव में करीब 81 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, 2,950 सीटों के लिए वोट डाले गए, जबकि 1,644 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए। इन चुनावों में BJP, टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी), कांग्रेस, माकपा और आईपीएफटी समेत कई दलों के उम्मीदवार मैदान में थे। कुल 8,176 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई।
एनडीए के खाते में 4,320 सीटें, BJP ने बताया बड़ा संदेश
5 अक्टूबर को घोषित नतीजों में एनडीए ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। BJP के मुताबिक, 4,597 सीटों में से एनडीए ने 4,320 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस सिर्फ 14 सीटों तक सीमित रही। एनडीए में बीजेपी के साथ टिपरा मोथा पार्टी भी शामिल है और इस चुनाव में टीएमपी ने बड़ी संख्या में सीटें हासिल की हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने नतीजों को लेकर कहा कि त्रिपुरा की जनता ने अपने वोट के जरिए अपनी बात स्पष्ट कर दी है। उन्होंने इसे एनडीए और विकास के प्रति लोगों के भरोसे से जोड़ते हुए त्रिपुरा की जनता का आभार जताया।
बैलेट पेपर के नतीजे दिखाकर राहुल गांधी पर बीजेपी का हमला
चुनाव परिणाम आने के बाद BJPप्रवक्ता संबित पात्रा ने सोशल मीडिया पर नतीजों को साझा करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में बैलेट पेपर से हुए चुनाव का परिणाम कांग्रेस को देखना चाहिए। बीजेपी का यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कई नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं राहुल गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे हैं। ऐसे में त्रिपुरा के चुनाव परिणाम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत हैं।
