मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में हाल ही में एक अनोखा और तीखा विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जोरदार मांग उठाई गई। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें हर हाल में अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इस दौरान उन्होंने मुंबई पुलिस के रवैये की खुलकर तारीफ की और दिल्ली पुलिस व प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए।
मुंबई पुलिस की तारीफ और दिल्ली पुलिस पर वार
प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने मुंबई पुलिस की कार्यशैली की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्हें ऊपर से प्रदर्शनकारियों को उठाने का सख्त आदेश मिला था, लेकिन मुंबई पुलिस ने नरमी बरतते हुए उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय चाय पिलाई और वहां से चले जाने का अनुरोध किया। दीपके ने कटाक्ष करते हुए कहा, “मुंबई पुलिस इतनी क्यूट है कि उन्होंने हमें उठाया नहीं, बल्कि कहा कि सर आप लोग चले जाइए।” इसके उलट, उन्होंने दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें ‘दरिंदा’ करार दिया और आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे उनके साथियों को सड़क पर घसीटा गया।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने का बड़ा आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे गूंजते रहे। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले दो सालों में देश भर में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से चुपचाप हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 15 फीसदी हिस्सा है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 1950 में जब देश गणतंत्र बना था, तब बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार दिया था, जिसे इस तरह से कमजोर करना संविधान के मूल अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
दिल्ली में महा-आंदोलन की चेतावनी
अभिजीत दीपके ने दिल्ली प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि आज जंतर-मंतर पर पुलिस ने जितने भी बैरिकेड्स लगाए हैं, वे नाकाफी साबित होंगे। उन्होंने हुंकार भरी कि आने वाले दिनों में देश के कोने-कोने से इतने लोग दिल्ली पहुंचेंगे कि सरकार के लिए बैरिकेड्स कम पड़ जाएंगे। सीजेपी के इस आक्रामक तेवर और शिवाजी पार्क के प्रदर्शन ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।
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