उत्तर प्रदेश के संभल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सांप के काटने के बाद चार साल का बच्चा करीब आठ दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। परिवार का आरोप है कि जिला अस्पताल में सर्पदंश के इलाज के दौरान एंटी वेनम की जगह एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और परिजन उसे निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया। अब इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ है और उसे अस्पताल से घर भेज दिया गया।
दीवार से कंचा निकालते समय करैत ने काटा
जानकारी के मुताबिक, संभल इलाके में रहने वाला चार वर्षीय अदीब घर के पास दीवार में फंसे कंचे को निकालने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान वहां छिपे करैत सांप ने उसे काट लिया। कुछ ही समय बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। घबराए परिजन उसे तुरंत संभल के जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। परिवार का कहना है कि वहां सर्पदंश के इलाज के लिए जरूरी एंटी वेनम देने के बजाय एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद बच्चे की स्थिति और खराब हो गई।
हालत बिगड़ी तो निजी अस्पताल में कराया भर्ती
जिला अस्पताल में इलाज को लेकर परिवार संतुष्ट नहीं था। बच्चे की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज शुरू किया और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। करीब आठ दिनों तक बच्चा बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर रहा। इस दौरान परिवार लगातार उसकी जिंदगी को लेकर चिंतित रहा। मामले की जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद जिला अस्पताल में हुए कथित इलाज को लेकर भी सवाल उठने लगे।
आठ दिन बाद आंखें खोलीं, फिर खाया खाना
लगातार इलाज के बाद गुरुवार को अदीब की हालत में सुधार हुआ और उसे होश आ गया। होश में आने के बाद बच्चे ने खाना भी खाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसकी स्थिति को बेहतर पाया। इसके बाद अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ ने बच्चे को फूलों की माला पहनाकर परिवार के साथ घर के लिए रवाना किया। लंबे इलाज के बाद बच्चे को स्वस्थ देखकर परिजनों ने भी राहत की सांस ली।
जांच के बाद फार्मेसिस्ट पर कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भी इसकी जांच कराई। बताया जा रहा है कि डीएम के निर्देश पर गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एक फार्मेसिस्ट को निलंबित किया गया है। हालांकि, परिवार की ओर से इलाज में लापरवाही के लिए जिम्मेदार डॉक्टर और सीएमएस पर भी कार्रवाई की मांग की जा रही है। परिजनों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में उन्हें भारी खर्च उठाना पड़ा और उनका बच्चा कई दिनों तक गंभीर हालत में रहा। अब प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इलाज के दौरान वास्तव में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी थी।
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