Amethi News: उत्तर प्रदेश के अमेठी में मंगलवार शाम रेलवे स्टेशन रोड पर उस समय लोगों की भीड़ जुट गई, जब बनारस से लौट रही एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने सड़क किनारे जुड़वा बच्चों को जन्म दे दिया। स्थानीय लोगों ने तुरंत 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन बताया गया कि एंबुलेंस करीब 25 से 30 मिनट बाद मौके पर पहुंची। इसके बाद महिला और दोनों नवजातों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमेठी ले जाया गया। चिकित्सकों की जांच में महिला और दोनों बच्चों की हालत सामान्य बताई गई।
बनारस से ट्रेन से अमेठी पहुंची थी महिला
बताया जा रहा है कि वनवासी समुदाय की ज्योति अपने पति के साथ बनारस गई थी। बताया गया कि दोनों वहां दोना-पत्तल बेचकर परिवार का गुजर-बसर करते हैं। मंगलवार शाम ज्योति और उसका पति काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस से Amethi रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। ट्रेन से उतरने के बाद दोनों स्टेशन से बाहर निकलकर पैदल जा रहे थे। इसी दौरान अचानक ज्योति को तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। हालत बिगड़ने पर वह रेलवे स्टेशन रोड के किनारे बैठ गई। कुछ ही देर में आसपास मौजूद लोगों को समझ आ गया कि महिला का प्रसव होने वाला है। लोगों ने तत्काल उसकी मदद करने की कोशिश शुरू की। महिला के पति ने चादर की मदद से उसे ढक दिया, ताकि सड़क पर मौजूद लोगों के बीच उसकी परेशानी कम हो सके। इसी बीच प्रसव की स्थिति और गंभीर हो गई।
सड़क किनारे ही एक के बाद एक जन्मे दोनों बच्चे
प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद ज्योति ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही सड़क किनारे जुड़वा बच्चों को जन्म दे दिया। अचानक हुई इस घटना से आसपास के दुकानदार और राहगीर भी हैरान रह गए। कुछ ही समय में वहां काफी लोग जमा हो गए। प्रत्यक्षदर्शी आनंद तिवारी के मुताबिक वह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की फ्रैंचाइजी पर बैठे थे। उन्होंने महिला को सड़क किनारे बैठते देखा था। स्थिति को समझने के बाद उन्होंने 108 एंबुलेंस पर फोन कर मदद मांगी। स्थानीय लोगों ने महिला और नवजातों को सुरक्षित रखने की कोशिश की। इस दौरान सभी की नजर एंबुलेंस के पहुंचने पर थी। बताया गया कि प्रसव पूरा होने तक महिला को अस्पताल नहीं ले जाया जा सका और सड़क पर ही दोनों बच्चों का जन्म हो गया।
सीएचसी की दूरी करीब एक किलोमीटर, फिर भी एंबुलेंस पहुंचने में लगा 25-30 मिनट
आनंद तिवारी के अनुसार घटनास्थल से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र Amethi की दूरी करीब एक किलोमीटर है। उनका कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में इतनी दूरी कम समय में तय हो सकती है, लेकिन सूचना देने के बाद एंबुलेंस को मौके पर पहुंचने में करीब 25 से 30 मिनट लग गए। इसी दौरान महिला ने दोनों बच्चों को जन्म दे दिया। घटना की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भी हुई। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी मनोज पटेल स्टाफ के साथ महिला की सहायता के लिए रेलवे स्टेशन की तरफ पहुंचे। उनके पहुंचने तक एंबुलेंस भी मौके पर आ गई थी। इसके बाद महिला और दोनों नवजातों को अस्पताल ले जाया गया। बताया गया कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और शुरुआत में एंबुलेंस से अस्पताल जाने को लेकर झिझक भी थी। स्थानीय लोगों ने परिवार को समझाया कि सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को बताया सुरक्षित
सीएचसी Amethi पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने महिला और दोनों नवजातों की जांच की। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच में जच्चा और दोनों बच्चों की स्थिति सामान्य पाई गई। तीनों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और जरूरी देखभाल दी गई। महिला और बच्चों के सुरक्षित होने से परिवार ने राहत की सांस ली। हालांकि सड़क पर हुए इस प्रसव ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल की दूरी करीब एक किलोमीटर होने के बावजूद एंबुलेंस को मौके तक पहुंचने में लगभग आधा घंटा क्यों लगा। घटना के बाद रेलवे स्टेशन रोड पर काफी देर तक लोगों के बीच इसी बात की चर्चा होती रही। फिलहाल महिला और दोनों नवजात सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने जरूरत के समय एंबुलेंस सेवा कितनी तेजी से उपलब्ध होती है, इस पर चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
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