बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) को लेकर पहली बार सीधे तौर पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) को बीजेपी के समर्थन से चुनाव में फायदा मिला और उनका अपना मजबूत जनाधार नहीं है। मायावती (Mayawati) ने दलित समाज से अपील की कि वह ऐसे राजनीतिक दावों से प्रभावित न हो। उन्होंने चंद्रशेखर की आंदोलन की राजनीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि प्रदर्शन के बाद युवाओं पर मुकदमे दर्ज होने के बजाय उन्हें न्याय दिलाने की कोशिश होनी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद पर मायावती का सीधा हमला
मायावती (Mayawati) ने चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) की राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि धरना-प्रदर्शन की वजह से कई युवाओं पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। मायावती (Mayawati) का कहना है कि युवाओं की समस्याओं को उठाने के साथ उन्हें कानूनी और सामाजिक मदद दिलाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। नगीना लोकसभा सीट से 2024 में चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने चुनाव जीता था। आधिकारिक परिणाम के मुताबिक, उन्होंने बीजेपी के ओम कुमार को हराया था। मायावती (Mayawati) का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
EVM को लेकर फिर सामने आया BSP का पुराना रुख
मायावती (Mayawati) ने चुनाव में EVM के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि BSP लंबे समय से EVM से मतदान का विरोध करती रही है। उनके मुताबिक, पार्टी ने इस व्यवस्था को अदालत में भी चुनौती दी थी। मायावती (Mayawati) ने VVPAT व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं होने से इस व्यवस्था का पूरा फायदा नहीं मिलता। यह BSP की ओर से उठाई गई आपत्ति है; इसे चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
बैलेट पेपर और SIR पर भी रखी मांग
बसपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए मतदान प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई। इसके साथ ही SIR को लेकर लोगों के बीच मौजूद कथित भ्रम को दूर करने की बात कही। मायावती (Mayawati) ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लेकर जनता का विश्वास मजबूत रहना चाहिए। अब उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में BSP और चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) के बीच बढ़ती दूरी पर चर्चा तेज हो गई है।
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