आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले के धर्मवरम में गणेश उत्सव के दौरान धार्मिक सद्भाव की मिसाल देखने को मिली। पार्थसारथी नगर में गणेश उत्सव के लिए रखे गए विशेष लड्डू की नीलामी में मुस्लिम दंपति चांदनी और मस्तान ने हिस्सा लिया। नीलामी के दौरान दोनों ने सबसे अधिक 1 लाख 45 हजार रुपये की बोली लगाकर लड्डू अपने नाम कर लिया। इसके बाद उन्होंने इसे अपने तक सीमित रखने के बजाय वहां मौजूद भक्तों में प्रसाद के रूप में बांट दिया।
16 साल से गणेश उत्सव में शामिल हो रहा परिवार
चांदनी ने बताया कि वह और उनके पति पिछले करीब 16 वर्षों से गणेश उत्सव से जुड़े हुए हैं। इस दौरान वे अपने दोस्तों के साथ मिलकर गणेश प्रतिमा भी स्थापित करते रहे हैं। उनके लिए यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आसपास के लोगों के साथ मिलकर खुशी मनाने और आपसी भाईचारा बढ़ाने का भी अवसर रहा है। इस बार लड्डू की नीलामी में उनकी भागीदारी ने पूरे आयोजन को खास बना दिया।
बेटे के लिए मांगी थी मन्नत
चांदनी के मुताबिक, उन्होंने मन में एक मन्नत रखी थी कि अगर उन्हें बेटा हुआ तो वह गणेश उत्सव के दौरान होने वाली लड्डू की नीलामी में बोली लगाएंगी और लड्डू लेकर भक्तों में बांटेंगी। उनकी यह इच्छा पूरी हुई और उन्हें बेटा हुआ। इसके बाद उन्होंने अपनी कही हुई बात को पूरा करने का फैसला किया। नीलामी में उन्होंने और उनके पति ने 1.45 लाख रुपये की सबसे बड़ी बोली लगाई और लड्डू प्राप्त किया।
लड्डू लेकर भक्तों में बांटा प्रसाद
नीलामी जीतने के बाद चांदनी और मस्तान ने लड्डू को अपने पास रखने के बजाय वहां मौजूद लोगों में प्रसाद के तौर पर बांट दिया। उनकी इस पहल की चर्चा पूरे इलाके में हुई। गणेश उत्सव के दौरान सामने आई यह घटना धार्मिक पहचान से अलग आपसी सम्मान, आस्था और भाईचारे का संदेश देती नजर आई। चांदनी और मस्तान की कहानी ने यह भी दिखाया कि अलग-अलग समुदायों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आयोजनों में सम्मान और खुशी के साथ शामिल हो सकते हैं।
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