बस्ती: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक चुनावी कार्यक्रम के सिलसिले में बस्ती जनपद के रुदौली विधानसभा क्षेत्र पहुंचे चंद्रशेखर आजाद ने खुले तौर पर बयान दिया कि मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के हालात किसी अघोषित इमरजेंसी से कम नहीं हैं। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि प्रदेश में आम जनमानस और कानून का राज खतरे में है। उनके इस तीखे बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज कर दी है।
चुनावी रणभूमि में रुदौली का सियासी दौरा
अपने इस दौरे के दौरान सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आगामी चुनाव को लेकर अपनी पार्टी की जमीन मजबूत करने का पूरा प्रयास किया। वह रुदौली विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरने जा रहे उम्मीदवार मोहम्मद आकिब के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे। जनसभा को संबोधित करने के बाद उन्होंने क्षेत्र में एक भव्य पदयात्रा भी निकाली, जिसके जरिए उन्होंने मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने और आकिब के पक्ष में माहौल तैयार करने की पूरी कोशिश की। इस दौरान उनके साथ समर्थकों की भारी भीड़ भी नजर आई, जिसने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को गर्मा दिया है।
पिछली और मौजूदा सरकारों पर वादाखिलाफी का वार
सत्ताधारी दल के साथ-साथ प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जनता से केवल झूठे वादे किए गए, लेकिन धरातल पर विकास की तस्वीर गायब है। उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए दावा किया कि आज सत्ता में बैठी सरकार को अपनी रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए आशा बहुओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, रोजगार सेवकों, अनुदेशकों और शिक्षकों जैसे सरकारी कर्मचारियों का सहारा लेना पड़ता है। इसके उलट उन्होंने अपनी पार्टी और भीम आर्मी के कार्यक्रमों का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां उमड़ रहे जनसैलाब के आगे बड़े-बड़े मैदान भी छोटे पड़ रहे हैं।
जनता के बीच बढ़ती सुगबुगाहट और राजनीतिक हलचल
चंद्रशेखर आजाद के इन आक्रामक तेवरों और बयानों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। एक तरफ जहां विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं आसपा प्रमुख का यह अंदाज युवाओं और दलित-पिछड़ों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। चंद्रशेखर आजाद ने जिस तरह से प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी नीतियों को कटघरे में खड़ा किया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में सूबे का सियासी पारा और ज्यादा चढ़ने वाला है।
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