आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में मंगलवार रात एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने सुबह-सुबह लोगों को हैरान कर दिया। आरटीसी कॉम्प्लेक्स के पास सेंट्रल पार्क के मुख्य गेट के सामने एक पेड़ के नीचे बड़ी संख्या में फटे हुए नोटों के टुकड़े पड़े मिले। सुबह टहलने निकले लोगों की नजर जब इस ढेर पर पड़ी, तो वहां भीड़ जुटने लगी। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इतने सारे नोट यहां किसने फेंके और इसके पीछे क्या वजह हो सकती है। मौके पर 500, 100, 50, 20 और 10 रुपये के नोटों के टुकड़े मिले थे। कुछ लोगों ने इसे किसी आपराधिक घटना से जोड़कर देखा, जबकि कुछ को लगा कि शायद किसी ने जानबूझकर करेंसी नष्ट की है। मामला संदिग्ध लगने पर पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद जांच शुरू हुई और घटनास्थल से मिले सामान ने पूरे मामले को एक अलग दिशा दे दी।
पैन कार्ड और एलआईसी की रसीदों से पुलिस को मिला सुराग
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो वहां केवल फटे नोट ही नहीं मिले, बल्कि एक पैन कार्ड और एलआईसी की कुछ रसीदें भी बरामद हुईं। नोटों के कुछ हिस्सों पर नंबर भी दिखाई दे रहे थे। पुलिस ने इन दस्तावेजों को जांच का आधार बनाया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। दस्तावेजों के जरिए उस व्यक्ति की पहचान करने का प्रयास किया गया, जिसके सामान से ये चीजें जुड़ी थीं। जांच के दौरान पुलिस को ताड़िवीधि इलाके के रहने वाले सूर्यराव के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उसे थाने बुलाकर पूछताछ की गई। पुलिस की पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उसने नोटों के ढेर से जुड़े रहस्य को काफी हद तक सुलझा दिया। मामला किसी बड़े अपराध के बजाय घर में रखे पैसों की खराब हालत और उसके बाद उठाए गए एक घबराहट भरे कदम से जुड़ा निकला।
घर में रखे पैसों को दीमक ने पहुंचाया नुकसान
पूछताछ में सूर्यराव ने बताया कि वह किराना दुकानों में सामान सप्लाई करने का काम करता है। उसने अपनी कमाई में से कुछ रुपये घर में संभालकर रखे थे। हालांकि, पैसे रखने के दौरान उसने इस बात का ध्यान नहीं रखा कि उन्हें नमी और कीड़ों से सुरक्षित रखना जरूरी है। समय बीतने के साथ नोटों में दीमक लग गई और वे धीरे-धीरे खराब होकर टुकड़ों में बदल गए। जब सूर्यराव को इसकी जानकारी हुई, तो वह परेशान हो गया। उसके मुताबिक, उसे डर था कि घरवालों को पैसे बर्बाद होने की बात पता चली तो वे उसे डांटेंगे। इसी घबराहट में उसने मंगलवार देर रात खराब नोटों को एक कवर में भरा और सेंट्रल पार्क के पास पेड़ के नीचे फेंक दिया। उसके अनुसार, फटे नोटों की कुल कीमत करीब 3,000 रुपये थी। इस तरह जिस घटना को लोग शुरू में किसी बड़ी साजिश से जोड़कर देख रहे थे, वह एक घरेलू परेशानी से जुड़ी निकली।
जल्दबाजी में दस्तावेज भी रह गए, पुलिस ने दी चेतावनी
सूर्यराव ने पुलिस को बताया कि कवर फेंकते समय उसे ध्यान नहीं रहा कि उसका पैन कार्ड और एलआईसी की रसीदें भी उसी सामान के साथ वहां गिर गई हैं। यही दस्तावेज बाद में पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग बने। पुलिस ने पूछताछ के बाद उसका बयान दर्ज किया और मामले की जांच की। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पुलिस को इस घटना में किसी आपराधिक साजिश का संकेत नहीं मिला। इसके बाद सूर्यराव को चेतावनी देकर भेज दिया गया और उसके दस्तावेज वापस कर दिए गए। पेड़ के नीचे मिले फटे नोटों की वजह सामने आने के बाद लोगों की शुरुआती आशंकाएं भी दूर हो गईं। इस घटना से यह भी पता चलता है कि जल्दबाजी में उठाया गया छोटा-सा कदम कभी-कभी किसी सामान्य घटना को भी रहस्यमय बना सकता है। हालांकि, करेंसी को सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि खराब या नष्ट हुए नोटों को लेकर बैंकिंग नियम लागू होते हैं।
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