Homeउत्तर प्रदेशलखनऊLucknow: करोड़ों की संपत्ति फिर भी अकेलापन नहीं गया! 84 साल की...

Lucknow: करोड़ों की संपत्ति फिर भी अकेलापन नहीं गया! 84 साल की उम्र में दुल्हन की तलाश, सम्मेलन में बताई दिल की बात

लखनऊ के वरिष्ठ नागरिक परिचय सम्मेलन में 84 वर्षीय करोड़पति बुजुर्ग ने साथी की तलाश की। जानिए क्यों संपत्ति और परिवार होने के बावजूद बुजुर्ग अकेलेपन से जूझ रहे हैं।

-

Lucknow में रविवार को आयोजित वरिष्ठ नागरिक परिचय सम्मेलन में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 50 से 90 साल की उम्र के करीब 90 बुजुर्ग इस कार्यक्रम में पहुंचे। इनमें लगभग 75 पुरुष और 15 महिलाएं शामिल थीं। ज्यादातर लोग विधुर, विधवा, तलाकशुदा या अविवाहित थे। कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे लोगों को एक-दूसरे से मिलने और जीवन के इस पड़ाव में साथी की तलाश का अवसर देना था। सम्मेलन में लोगों ने अपनी जिंदगी के अनुभव साझा किए और बताया कि उम्र बढ़ने के साथ उन्हें किस तरह अकेलेपन का सामना करना पड़ रहा है। इसी दौरान 84 वर्षीय एक बुजुर्ग की कहानी चर्चा में आ गई, जिनके पास करोड़ों की संपत्ति और परिवार होने के बावजूद जीवन में एक साथी की कमी महसूस हो रही है।

84 साल की उम्र में साथी की तलाश क्यों?

Lucknow में सम्मेलन में पहुंचे 84 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि उन्होंने करीब 30 साल अकेले गुजारे हैं। आर्थिक रूप से उनके पास किसी चीज की कमी नहीं है और परिवार भी है, लेकिन अकेलापन लगातार महसूस होता है। उनकी इच्छा है कि जीवन के इस पड़ाव पर कोई ऐसा साथी मिले, जिसके साथ रोजमर्रा की बातें साझा की जा सकें और साथ बैठकर समय बिताया जा सके। उनकी कहानी यह बताती है कि उम्र और आर्थिक स्थिति के बावजूद इंसान को भावनात्मक साथ की जरूरत बनी रहती है। सम्मेलन में मौजूद अन्य बुजुर्गों ने भी इसी तरह की भावनाएं साझा कीं। कई लोगों ने कहा कि उन्हें बड़ी संपत्ति या किसी खास सुविधा की तलाश नहीं, बल्कि ऐसा इंसान चाहिए जो उनकी बात सुने और उनके साथ कुछ समय बिताए।

- Advertisement -

30 साल से अकेली महिला ने भी बताई अपनी परेशानी

कार्यक्रम में दिल्ली से आई 55 वर्षीय एक महिला ने भी अपने जीवन का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पति की मृत्यु के बाद करीब तीन दशक से वह अकेली रह रही हैं। उनके बच्चे बड़े होकर अलग-अलग शहरों में बस गए हैं। परिवार होने के बावजूद रोजमर्रा की जिंदगी में साथ की कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि दिनभर की व्यस्तता के बाद शाम के समय घर की खामोशी ज्यादा परेशान करती है। उनका मानना है कि जिंदगी के इस पड़ाव पर किसी ऐसे व्यक्ति का साथ होना जरूरी है, जिससे मन की बातें की जा सकें। इसी तरह 67 वर्षीय पूर्व पुलिसकर्मी ने बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुजार दिया। अब जब जिम्मेदारियां कम हुईं तो अकेलापन ज्यादा महसूस होने लगा है।

महिलाओं के लिए समाज की सोच अब भी बड़ी चुनौती

प्रयागराज से आई एक महिला ने कहा कि बुढ़ापे में साथी की जरूरत महिलाओं को भी होती है, लेकिन सामाजिक सोच और परिवार का दबाव उनके लिए नई जिंदगी शुरू करने का रास्ता मुश्किल बना देता है। सम्मेलन के आयोजकों के मुताबिक ऐसे कार्यक्रमों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अक्सर कम रहती है। रविवार के कार्यक्रम में भी यही स्थिति देखने को मिली। आयोजकों का कहना है कि कई महिलाएं सामाजिक रूढ़ियों और परिवार की प्रतिक्रिया के डर से ऐसे कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पातीं। वहीं, अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए साथी का मिलना केवल भावनात्मक जरूरत नहीं है। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजमर्रा के जीवन में भी सहारा मिल सकता है। सम्मेलन में कई बुजुर्गों ने एक-दूसरे से संपर्क साझा किए। उनका कहना था कि जीवन के आखिरी पड़ाव में उन्हें किसी बड़ी चीज की नहीं, बस एक ऐसे साथी की जरूरत है जिसके साथ बैठकर बात की जा सके, खाना खाया जा सके और अकेलेपन को थोड़ा कम किया जा सके।

Read More-Lucknow: बच्चों को स्कूल भेजने के बाद घर में मिली दंपती की लाश, फंदे पर था पति और चारपाई पर पत्नी; मचा हड़कंप

 

- Advertisement -

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest posts