दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर इन दिनों छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय पुलिस चौकी के इंचार्ज दरोगा अविरल मिश्रा धरने पर बैठे छात्रों को ‘ठंडा कर दूंगा’ जैसी भाषा में धमकाते हुए नजर आ रहे हैं। यह पूरा मामला 8 सितंबर की दोपहर का है, जब विश्वविद्यालय में छात्र नेता सतीश प्रजापति और उज्ज्वल सिंह विभिन्न मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। प्रदर्शन के दौरान एडिशनल प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय और छात्रों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हाथापाई तक पहुंच गई। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंचे दरोगा अविरल मिश्रा ने आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ संयम बरतने के बजाय आक्रामक रुख अपनाया और उन्हें खुलेआम धमकी दे डाली, जिसके बाद यह मामला तूल पकड़ गया।
अखिलेश यादव का हमला और पुलिस के रवैये पर सवाल
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के इस वायरल वीडियो के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस वीडियो को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए सीधे तौर पर यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव ने अपने बयान में लिखा कि पुलिसकर्मी सत्ता के इशारे पर काम कर रहे हैं, इसलिए वे मौखिक रूप से इतने ज्यादा उद्वेलित और आक्रामक हो रहे हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन को नसीहत देते हुए कहा कि प्रदर्शन करने वाले ये युवा देश के भविष्य और आंदोलनकारी छात्र हैं, न कि कोई हार्डकोर अपराधी, जिनके साथ इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया जाए। इस राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद से पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों पर भी मामले की गंभीरता को देखते हुए दबाव बढ़ गया है।
दरोगा अविरल मिश्रा का पुराना और विवादित इतिहास
विवादों में घिरे दरोगा अविरल मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने मुरादाबाद पुलिस ट्रेनिंग सेंटर से अपनी ट्रेनिंग पूरी की है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब अविरल मिश्रा अपनी किसी कार्यशैली या बदजुबानी को लेकर चर्चा में आए हों, बल्कि उनका विवादों से पुराना नाता रहा है। इसी साल 18 मई को जब वे कैंपियरगंज थाना क्षेत्र की चौकी पर तैनात थे, तब उन पर ईंट भट्टे की मिट्टी ढोने वाले वाहनों को अवैध तरीके से रोकने और ब्लॉक प्रमुख संजय सिंह के साथ फोन पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगा था। बात यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि आरोप था कि उसी शाम वह भारी पुलिस बल के साथ ईंट भट्टे पर जा पहुंचे और वहां मौजूद आम कर्मचारियों के साथ भी बेहद अभद्र व्यवहार किया। उस समय तत्कालीन एसपी नॉर्थ की विस्तृत जांच में ये सभी आरोप पूरी तरह सही पाए गए थे, जिसके बाद तत्कालीन एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने उन्हें तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर करते हुए विभागीय जांच के आदेश दे दिए थे।
छात्रों का अड़े रहना और नए कुलपति का मिला आश्वासन
दरोगा द्वारा दी गई धमकी के बाद यूनिवर्सिटी के छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। भूख हड़ताल का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता सतीश प्रजापति ने दो टूक शब्दों में आरोप लगाया है कि खाकी वर्दी पहने इस दरोगा ने न केवल उनके साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, बल्कि खुलेआम गालियां भी दीं, जो पूरी तरह से असंवैधानिक और पुलिस आचार संहिता के खिलाफ है। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों के भीतर उनकी सभी जायज मांगें नहीं मानी गईं, तो यह भूख हड़ताल आमरण अनशन में बदल जाएगी और वे जल का त्याग भी कर देंगे। दूसरी ओर, हाल ही में कार्यभार संभालने वाले विश्वविद्यालय के नए कुलपति ने पूरे मामले पर संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि कैंपस का हर एक छात्र देश की अनमोल संपत्ति और भविष्य है। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से संवाद स्थापित करने का भरोसा दिया है और यह आश्वासन दिया है कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह पूरी तरह से छात्रहित में होगा।
