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प्रशासन ने तोड़ा मंदिर, लेकिन हनुमान जी की 170 साल पुरानी प्रतिमा हटाने पर क्यों फूल रहे हाथ-पैर? अब संतों ने संभाला मोर्चा

उज्जैन में हनुमान मंदिर की प्रतिमा विस्थापन को लेकर विवाद बढ़ गया है। संतों और श्रद्धालुओं ने विरोध शुरू किया। जानिए पूरा मामला और क्यों बढ़ा विवाद।

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Ujjain News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की प्रशासनिक कोशिश के बाद विवाद गहरा गया है। प्रतिमा हटाए जाने की खबर सामने आने के बाद साधु-संतों, हिंदूवादी संगठनों और श्रद्धालुओं ने विरोध शुरू कर दिया। मंगलवार को मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग जुटे और प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि महाराज भी मौके पर पहुंचे और प्रतिमा को हटाने का विरोध किया।

कई कोशिशों के बाद भी नहीं हिली प्रतिमा, आस्था से जोड़ रहे लोग

प्रदर्शन कर रहे संतों और श्रद्धालुओं का दावा है कि प्रशासन, नगर निगम और पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम पहले भी प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का प्रयास कर चुकी है। हालांकि, उनकी कोशिश सफल नहीं हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच यह बात तेजी से फैलने लगी कि हनुमान जी स्वयं अपनी जगह से नहीं हटना चाहते। लोग इस पूरे मामले को धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। संतों का कहना है कि जब प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हो रही है तो प्रशासन को अपनी कार्रवाई पर दोबारा विचार करना चाहिए।

मंदिर के बाहर गूंजा हनुमान चालीसा, संतों ने किया विरोध

विरोध के बीच मंगलवार सुबह से ही मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। लोगों ने मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन किया और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए प्रतिमा की सुरक्षा की प्रार्थना की। महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि महाराज के साथ कई संत और हिंदूवादी संगठन से जुड़े लोग भी मौके पर मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर प्रतिमा को हटाने की अनुमति नहीं देंगे। इस दौरान धार्मिक नारों और भजन-कीर्तन के बीच मंदिर परिसर में माहौल काफी सक्रिय रहा।

सोशल मीडिया पर खबर वायरल, दूसरे जिलों से भी पहुंचने लगे श्रद्धालु

प्रतिमा को विस्थापित करने की जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों की भीड़ और बढ़ गई। उज्जैन के साथ आसपास के इलाकों से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। कई लोगों ने प्रतिमा से जुड़े अपने अनुभव और मान्यताएं साझा कीं। श्रद्धालुओं का एक वर्ग इसे चमत्कार मान रहा है और उनका कहना है कि जब विशेषज्ञों और मशीनों की मदद से भी प्रतिमा को हटाना संभव नहीं हुआ, तो इसे भगवान हनुमान की इच्छा के रूप में देखा जाना चाहिए। फिलहाल विरोध के बीच लोगों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर बनी हुई है।

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