2025 के बरेली हिंसा मामले में जेल में बंद इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के संस्थापक मौलाना तौकीर रजा को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने अपने आदेश में कहा कि मामले के रिकॉर्ड और परिस्थितियों को देखते हुए तौकीर रजा को फिलहाल जमानत पर रिहा करने का आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी नोट किया कि मामले में 21 दिसंबर 2025 को आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, लेकिन अभी आरोप तय नहीं हुए हैं। तौकीर रजा 13 अक्टूबर 2025 से जेल में हैं।
रैली के आह्वान के बाद बिगड़े थे हालात
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 26 सितंबर 2025 को जुमे की नमाज के बाद तौकीर रजा ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से इस्लामिया इंटर कॉलेज परिसर में जुटने की अपील की थी। यह मामला ‘आई लव मोहम्मद’ अभियान के समर्थन में प्रस्तावित रैली को अनुमति नहीं मिलने के विरोध से जुड़ा था। आरोप है कि बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने के बावजूद करीब 200 से 250 लोग जमा हुए और मार्च की ओर बढ़े। पुलिस के मुताबिक, भीड़ को रोकने की कोशिश के दौरान स्थिति बिगड़ गई। प्राथमिकी में पुलिस पर पथराव, तेजाब से भरी बोतलें फेंकने और गोलीबारी के आरोप भी लगाए गए हैं। हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों के घायल होने और पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़े जाने का भी उल्लेख है।
कोर्ट ने भाषण और बाद की प्रतिक्रिया को माना अहम
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान तौकीर रजा के कथित भाषण और घटना के बाद उनकी प्रतिक्रिया पर भी गौर किया। अदालत के मुताबिक, रिकॉर्ड में ऐसा उल्लेख है कि घटना के बाद लोगों के कृत्यों की तारीफ की गई और उन्हें धन्यवाद दिया गया। राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने अदालत के सामने एक विवादित नारे का भी जिक्र किया। अदालत ने राज्य की इस दलील पर सहमति जताई कि इस नारे को सामान्य धार्मिक उद्घोषों के समान नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि संबंधित नारा कानून के शासन के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देने वाला बताया गया है।
अभी आरोप तय नहीं, जेल में ही रहेंगे तौकीर रजा
अदालत ने यह भी कहा कि बिना प्रशासन की अनुमति के बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र करना और बाद में पुलिस के साथ कथित हिंसक टकराव को सही नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, कोर्ट का यह आदेश जमानत याचिका पर है और मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अभी बाकी है। आरोप तय होने और ट्रायल की प्रक्रिया के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल हाई कोर्ट से जमानत नहीं मिलने के कारण मौलाना तौकीर रजा को जेल में ही रहना होगा।
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