हरियाणवी गायक अंकित बलियान की हत्या का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा इस सनसनीखेज मर्डर को जाट समाज से जोड़े जाने के बाद सूबे में सियासी घमासान छिड़ गया है। इस बयान के सामने आने के बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इस घटना को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं बीजेपी और उसके सहयोगी दल इस दुखद घटना में भी राजनीति तलाशने का गंभीर आरोप सपा प्रमुख पर लगा रहे हैं।
स्वतंत्र देव सिंह का तंज: दुख की घड़ी में भी जाति-गोत्र की बात कर रहे हैं अखिलेश
अखिलेश यादव के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां अंकित के माता-पिता अपने जवान बेटे की मौत से पूरी तरह टूट चुके हैं और गहरे दुख में हैं, वहीं अखिलेश यादव ऐसे वक्त में भी जातिवाद, क्षेत्रवाद और गोत्रवाद की राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं। स्वतंत्र देव सिंह ने दावा किया कि योगी सरकार के राज में अपराध के खिलाफ शत-प्रतिशत कार्रवाई होती है और इस मामले में भी हरियाणा पुलिस के साथ-साथ यूपी की एसटीएफ अपराधियों को पकड़ने के लिए दिन-रात जुटी हुई है, जिन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
सांसद बृजलाल का पुराना वार: सपा शासनकाल के दंगों की दिलाई याद
बीजेपी के राज्यसभा सांसद बृजलाल ने भी अखिलेश यादव पर जोरदार पलटवार करते हुए उन्हें कानून व्यवस्था के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को प्रदेश की कानून व्यवस्था पर उंगली उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। सांसद ने शामली की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा के पुराने शासनकाल में अपराधियों को बचाने का काम किया जाता था, जिसके कारण बड़े पैमाने पर दंगे भड़कते थे। उन्होंने दो टूक कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी उत्कृष्ट है कि अपराधी या तो जेल में हैं या प्रदेश छोड़कर भाग रहे हैं, और राज्य में लगातार भारी निवेश आ रहा है।
जयंत चौधरी की दो टूक: संगीन अपराध में जाति तलाशना सरासर संवेदनहीनता
इस पूरे विवाद में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने भी कूदते हुए अखिलेश यादव को कड़ा जवाब दिया है। जयंत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हत्या जैसे बेहद संगीन और दुखद अपराध में भी जाति और गोत्र तलाशना इंसान की घोर संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में सभी को जाति, गोत्र और क्षेत्रीय भेदों से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं के साथ पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए। अंकित बाल्यान को न्याय मिलना केवल किसी एक जाति का नहीं, बल्कि हर न्यायप्रिय नागरिक की प्राथमिकता होनी चाहिए, जिस पर राजनीति करना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
