Akhilesh Yadav: आरक्षण सुधार आंदोलन को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म करने की कोशिश की जा रही है और इसे सुधार का नाम देकर पीडीए समाज के अधिकारों को प्रभावित करने की साजिश की जा रही है। अखिलेश ने साफ शब्दों में कहा कि आरक्षण किसी की इच्छा पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह पीडीए समाज का अधिकार है।
अखिलेश बोले- आरक्षण था, है और रहेगा
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि आरक्षण में सुधार के नाम पर उसे खत्म करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी समय-समय पर ‘समीक्षा’, ‘सुधार’ और ‘क्रीमीलेयर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं। अखिलेश के मुताबिक इन प्रयासों का असर उन वर्गों पर पड़ सकता है, जिन्हें लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आरक्षण पीडीए का अधिकार है और इसमें किसी तरह की कटौती या बदलाव को लेकर समाज में चिंता स्वाभाविक है। अपने बयान के अंत में उन्होंने दोहराया कि आरक्षण पहले भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा।
‘आरक्षण सुधार’ के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के ख़िलाफ़ एक और गहरी साज़िश है। आरक्षण पीडीए का अधिकार है किसी की इच्छा का विषय नहीं।
भाजपा व उनके संगी-साथी समय-समय पर जिस तरह कभी ‘समीक्षा’ तो कभी ‘सुधार’ जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग कर आरक्षण का विरोध करते…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 22, 2026
जंतर-मंतर के आंदोलन से जुड़ी है पूरी बहस
आरक्षण को लेकर यह राजनीतिक बयानबाजी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के बीच सामने आई है। इस आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की थी। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर उन्हें ज्ञापन भी सौंपा। ब्रजेश पाठक ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिया था कि उनकी मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा और जल्द ही केंद्रीय मंत्री के साथ उनकी बैठक कराने की कोशिश की जाएगी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे ने छात्रों की शिक्षा व्यवस्था और अवसरों से जुड़ी चिंताओं को डिप्टी सीएम के सामने रखा था।
छात्रों की मांग में क्या है खास?
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के बीच पढ़ाई और मेरिट के स्तर पर अंतर दिखाई देता है। उनका तर्क है कि सभी बच्चों को अपनी क्षमता विकसित करने के लिए बेहतर और पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। छात्रों ने व्यावसायिक और प्रोफेशनल कोर्स में अवसर बढ़ाने की मांग की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। उनका कहना है कि नए अवसर तैयार किए जाने चाहिए, जिससे किसी भी छात्र को सिर्फ अवसरों की कमी के कारण नुकसान न उठाना पड़े। अब एक तरफ आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के बयान के बाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर यूपी की राजनीति में चर्चा के केंद्र में आ गया है।
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