उत्तर प्रदेश में त्योहारी सीजन से ठीक पहले बढ़ती महंगाई और चीनी के बढ़ते दामों ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ हफ्तों में खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतों में लगभग 15 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिला है, जिससे लोग परेशान हैं। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम उपभोक्ताओं को त्योहारी सीजन के दौरान उचित दरों पर आसानी से चीनी मिलती रहे और किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी या संकट पैदा न हो सके।
30 दिन और 400 टन की सीमा तय
राज्य सरकार की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब प्रदेश का कोई भी व्यापारी या डीलर तय सीमा से ज्यादा नियमों को ताक पर रखकर भंडारण नहीं कर पाएगा। गन्ना मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कोई भी व्यक्ति या व्यापारी 30 दिनों से अधिक समय तक चीनी का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकता है। इसके अलावा, यदि किसी के पास एक बार में 400 टन से अधिक चीनी का स्टॉक पाया जाता है, तो प्रशासन द्वारा उनके खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह कदम जमाखोरी पर नकेल कसने और बाजार में आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
मिलों के पास भारी भरकम स्टॉक मौजूद
खाद्य और उपभोक्ता मामलों के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई से अगस्त के बीच चीनी के दाम 48 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर सीधे 55 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गए थे। हालांकि, सरकार का दावा है कि राज्य में चीनी की कोई कमी नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में यूपी की विभिन्न चीनी मिलों के पास कुल 179.38 लाख क्विंटल चीनी का पर्याप्त भंडार सुरक्षित है। इसमें अकेले निजी मिलों के पास 150.50 लाख क्विंटल, सहकारी मिलों के पास 23.60 लाख क्विंटल और निगम द्वारा संचालित मिलों के पास 5.28 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध है, जो मांग को पूरा करने के लिए काफी है।
किसानों के लिए नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर से
एक तरफ जहां सरकार कालाबाजारी करने वालों पर शिकंजा कस रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। गन्ना मंत्री ने जानकारी दी है कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस साल गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान किया गया है। इसके साथ ही, आगामी गन्ने का नया पेराई सत्र इसी साल 15 अक्टूबर से शुरू होने जा रहा है, जिससे चीनी के उत्पादन में और तेजी आएगी। प्रशासन की इस चेतावनी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जमाखोरों पर लगाम लगेगी और आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों में स्थिरता देखने को मिलेगी।
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