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आशुतोष रांका ने PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर किया पलटवार, बोले- ‘80 साल बाद भी…’

 PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर Ashutosh Ranka ने सरकारी स्कूलों और ग्रामीण बच्चों की बुनियादी शिक्षा का मुद्दा उठाया।

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Ashutosh Ranka News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर अब सामाजिक कार्यकर्ता और CJP से जुड़े आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) ने प्रतिक्रिया दी है। जयपुर में उन्होंने पीएम मोदी के बयान के संदर्भ में सरकारी स्कूलों और गांवों में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया। रांका ने कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी देश के कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के सरकारी स्कूलों की स्थिति देखने और जरूरत पड़ने पर प्रशासन के सामने आवाज उठाने की अपील की।

‘गांवों के बच्चों की हालत किसी से छिपी नहीं’

आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) ने कहा कि देश की बड़ी आबादी आज भी गांवों में रहती है और वहां रहने वाले बच्चों के लिए सरकारी स्कूल शिक्षा का प्रमुख माध्यम हैं। उनके मुताबिक, कई जगहों पर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी दिखाई देती है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों से सिर्फ सरकार पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्तर पर भी जिम्मेदारी निभाने की अपील की। रांका ने कहा कि आम लोगों को अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का दौरा करना चाहिए और वहां की वास्तविक स्थिति को समझना चाहिए। उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा समाज के हर वर्ग की चिंता होना चाहिए।

लोगों से स्कूलों का दौरा करने की अपील

आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) ने अपनी बात रखते हुए लोगों से अपील की कि वे अपने-अपने इलाकों में मौजूद सरकारी स्कूलों तक जाएं। उन्होंने कहा कि स्कूलों की स्थिति जानने के बाद स्थानीय सरपंच और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की जानी चाहिए। अगर स्कूल में किसी तरह की समस्या है तो उसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जानी चाहिए। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर लोगों की सक्रिय भागीदारी से सरकारी स्कूलों से जुड़ी कई समस्याओं को सामने लाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षा को बच्चों का अधिकार बताते हुए इस दिशा में समाज की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

समस्या दूर नहीं हुई तो प्रदर्शन की बात

आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) ने कहा कि अगर शिकायत करने के बावजूद स्कूलों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता है तो लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा सकते हैं। उन्होंने प्रदर्शन की अपील करते हुए कहा कि बच्चों की बुनियादी शिक्षा के अधिकार से समझौता नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि स्कूलों की खराब व्यवस्था का सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए सरकार और प्रशासन को शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने लोगों से इस मुद्दे को केवल चर्चा तक सीमित न रखने और अपने क्षेत्र के स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए सक्रिय होने की अपील की।

‘बच्चों का भविष्य खराब नहीं होने देंगे’

आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka)   ने कहा कि उनकी मुहिम का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने और बच्चों को जरूरी बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराने से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के इतने वर्षों बाद भी अगर बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने शिक्षा और ग्रामीण बच्चों की स्थिति को चर्चा के केंद्र में रखा। अब उनके इस बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सरकारी स्कूलों की स्थिति और बुनियादी शिक्षा को लेकर भी चर्चा में आ गया है।

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