बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सत्ता से बेदखल होने और देश छोड़ने के बाद आखिरकार पहली बार दुनिया के सामने अपनी चुप्पी तोड़ी है। नई दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शेख हसीना बुरी तरह भावुक हो गईं और अपने परिवार के सदस्यों को याद करके फफक-फफक कर रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि आज वह सिर्फ एक पूर्व प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि अपने देश के राष्ट्रपिता की बेटी के तौर पर बात कर रही हैं। पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपने प्यारे बांग्लादेश को जिन मुश्किलों से गुजरते देखा है, उसने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि आज हर तरफ डर का माहौल है और हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि इसे देखकर दिल दहल जाता है।
‘यह छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक हिंसा थी’
शेख हसीना ने साल 2024 के जुलाई और अगस्त के उन दिनों को याद करते हुए बड़ा सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने साफ कहा कि वह विरोध प्रदर्शन छात्रों का कोई आम और शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। उनकी सरकार ने शुरू से ही बातचीत और धैर्य के साथ इस मुद्दे को सुलझाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन कुछ खास और संगठित समूहों ने सुधार की आंग में छात्रों की मांगों को एक हिंसक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। इन ताकतों का मकसद देश की भलाई नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ सत्ता हासिल करना था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिस स्टेशनों को जलाया जा रहा हो, सरकारी संपत्तियों और मेट्रो स्टेशनों को तहस-नहस किया जा रहा हो, तब कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों का क्या फर्ज बनता है?
’10 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं की जान गई, मेरे ऊपर थोप दिए गए 600 से अधिक झूठे केस’
अपने शासनकाल के बाद देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए हसीना ने बताया कि आवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जुल्मों की हदें पार हो रही हैं। उनके 10 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं या तो मौत के घाट उतार दिए गए हैं या फिर वे रहस्यमय तरीके से लापता हैं। एक लाख से ज्यादा लोग इस राजनीतिक हिंसा से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और उनके खुद के खिलाफ 600 से अधिक झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने 1975 में अपने पूरे परिवार को खो दिया था और 6 साल तक देश से बाहर निर्वासन का जीवन काटा था। वह देश की जनता से कभी अलग नहीं हुई हैं, लेकिन आज उनके देश में जबरन वसूली, हत्याएं और अराजकता आम बात बन चुकी है।
‘बांग्लादेश बन चुका है दूसरा पाकिस्तान, यूनुस सरकार ने हत्याओं को दे दी कानूनी सुरक्षा’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बांग्लादेश अब धीरे-धीरे एक और पाकिस्तान में तब्दील हो चुका है। देश में राजनीतिक हत्याओं का दौर जारी है और पुलिस हिरासत में लगातार मौतें हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा यूनुस सरकार ने एक ऐसा विवादित बिल पास किया है, जिसके तहत पुलिस द्वारा की गई हत्याओं के लिए किसी पर भी मुकदमा नहीं चलाया जा सकेगा और पुलिसकर्मियों को पूरी कानूनी सुरक्षा दे दी गई है। आवामी लीग के समर्थक पत्रकारों और संपादकों को जेलों में ठूंस दिया गया है। अंत में उन्होंने भारत जैसे बड़े लोकतंत्र और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का आह्वान किया कि वे बांग्लादेश के इन गंभीर और खौफनाक हालातों को दुनिया के सामने प्रमुखता से उठाएं।
