राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शन के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजनीति के गलियारों में एक ऐसा बड़ा बयान दे दिया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जंतर-मंतर पर अपने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराने के बाद अब अभिजीत दीपके और उनकी टीम ने अपनी आगामी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह रुख आने वाले दिनों में देश की युवा राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है। अभिजीत के आवास पर पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की एक अहम बैठक का दौर शुरू हो चुका है, जिसमें संगठन के भविष्य और इसके विस्तार को लेकर गहन मंथन किया जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक चर्चाओं में अभिजीत दीपके का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।
युवाओं की नब्ज टटोलने के लिए शुरू हुई खास बैठक
सूत्रों और हालिया इंटरव्यू के मुताबिक, अभिजीत दीपके और उनके सहयोगी देश की जनरेशन ज़ी (Gen Z) यानी युवाओं से सीधे जुड़ने की तैयारी में हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि आज का युवा वास्तव में किन बुनियादी मुद्दों पर बदलाव चाहता है और उनकी प्राथमिकताएं क्या हैं। इसी सिलसिले में बुधवार से शुरू हुई दो दिवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं के मन की बात टटोलना और पार्टी का कोर एजेंडा तैयार करना है। बैठक में यह भी चर्चा की जा रही है कि इस सामाजिक आंदोलन को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जाए, ताकि देश के कोने-कोने तक आवाज पहुंचाई जा सके। अभिजीत का साफ कहना है कि वे किसी भी फैसले को जल्दबाजी में लेने के बजाय पूरी योजना के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं, ताकि आंदोलन की मूल भावना से कोई समझौता न हो।
क्या वाकई चुनावी मैदान में उतरेंगे अभिजीत दीपके?
राजनीति में अपनी एंट्री को लेकर अभिजीत दीपके ने पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक संतुलित रुख अपनाया है। उन्होंने हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में साफ किया है कि फिलहाल उनका इरादा सीधे तौर पर चुनाव लड़ने का नहीं है, लेकिन उन्होंने इस संभावना को सिरे से खारिज भी नहीं किया है। उनका मानना है कि मौजूदा समय में देश को किसी नई राजनीतिक पार्टी की उतनी जरूरत नहीं है, जितनी कि एक मजबूत जन-आंदोलन की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर आने वाले समय में देश की आम जनता और बहुसंख्यक युवा यह चाहते हैं कि वे राजनीतिक दल बनाकर चुनाव लड़ें, तो वे जनता की इस मांग पर गंभीरता से विचार करेंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक पंडितों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या आने वाले चुनावों में एक नया राजनीतिक विकल्प देखने को मिल सकता है।
संस्थानों पर जनता का भरोसा बहाल करना है असली मकसद
अभिजीत दीपके का मुख्य फोकस इस बात पर है कि देश के युवाओं का मौजूदा व्यवस्था, यानी नेताओं, अदालतों और मीडिया से लगातार भरोसा कम होता जा रहा है। उनका कहना है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का मुख्य उद्देश्य देश के सभी प्रमुख संस्थानों पर जनता के खोए हुए भरोसे को वापस लाना और उनकी जवाबदेही तय करना है। फिलहाल उनकी पार्टी सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाए रखने और युवाओं की आवाज को बुलंद करने की रणनीति पर काम कर रही है। यदि इस सामाजिक आंदोलन को जनता का व्यापक समर्थन मिलता रहा और युवाओं का कारवां इसी तरह जुड़ता रहा, तो आने वाले वक्त में यह संगठन देश की मुख्यधारा की राजनीति में एक बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है।
