धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके और उनके परिवार की हो रही है। इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके का एक बेहद भावुक बयान सामने आया है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि इस लंबी और कठिन लड़ाई के दौरान उनके मन में डर का माहौल बना रहता था, क्योंकि उनके बेटे को इस सियासी संघर्ष के दौरान कई बार शारीरिक हमलों और विरोध का सामना करना पड़ा था।
रातों की नींद उड़ी, भूख-प्यास सब भूली मां
अनीता दीपके ने अपने बेटे के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से उनके पूरे परिवार की मानसिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि जब उनके बेटे को थप्पड़ मारा गया और प्रताड़ित किया गया, तो वह पूरी रात सो नहीं पाई थीं। सुबह के तीन-चार बज जाते थे और वे जागकर सिर्फ यही सोचती रहती थीं कि आगे क्या होगा। पिछले 7 जून से उनके घर का माहौल ऐसा हो गया था कि किसी का भी किसी काम में मन नहीं लगता था। मां-बेटे दोनों की भूख और नींद पूरी तरह से गायब हो चुकी थी, क्योंकि हर पल एक अनहोनी की आशंका सताती रहती थी।
कम उम्र में बेटे के बड़े कदम पर गर्व
सारी परेशानियों और डर के बावजूद, अनीता दीपके के चेहरे पर आज गर्व की एक अलग ही चमक साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा भले ही उम्र में अभी बहुत छोटा है, लेकिन उसने कम उम्र में ही जिस दृढ़ता और साहस के साथ यह बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। मां के रूप में उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि अभिजीत ने सच्चाई का साथ नहीं छोड़ा और अपने संकल्प पर डटे रहे। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने जो काम कर दिखाया है, उसने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है और आज उन्हें अपनी परवरिश पर पूरा भरोसा है।
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप और भविष्य की हलचल
अभिजीत दीपके की मां का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश की राजनीति में इस्तीफे को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बढ़ते प्रभाव और इस संघर्ष के बाद राजनीतिक दलों में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे प्रकरण ने युवाओं के बीच एक नई राजनीतिक चेतना को जन्म दिया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी इस सियासी उठापटक के बाद अपनी अगली रणनीति क्या तय करती है, क्योंकि इस घटना ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान दिला दी है।
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