महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले में भिवंडी पुलिस को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस बहुचर्चित मामले का मुख्य मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस ने जाल बिछाकर उसे बिहार से धर दबोचा और ट्रांजिट रिमांड पर पुणे एयरपोर्ट होते हुए भिवंडी ले आई है। शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मास्टरमाइंड बिजेंद्र ने अपने एक अन्य साथी सोनू के साथ मिलकर प्रिंटिंग हाउस के कर्मचारियों को भारी-भरकम पैसों और प्रॉपर्टी का लालच दिया था, जिसके बाद परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्रों को अवैध तरीके से हासिल किया गया। हैरानी की बात यह है कि इन गोपनीय दस्तावेजों को प्रिंटिंग हाउस से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया गया और इन्हें जूतों के अंदर छिपाकर बाहर लाया गया था। इस सनसनीखेज साजिश के तहत महज आठ हजार रुपये में खरीदे गए इन प्रश्नपत्रों को महाराष्ट्र के पुणे और भिवंडी जैसे इलाकों में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक में बेचने की बात सामने आई है।
भिवंडी पुलिस का जासूसी जाल और गिरफ़्तारी का सिलसिला
यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला तब उजागर हुआ जब भिवंडी पुलिस को इसके बारे में गुप्त सूचना मिली। पुलिस महकमे में हड़कंप मचते ही भिवंडी डीसीपी पवन बंसोडे के नेतृत्व में एक विशेष अभियान चलाया गया। इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए एक तेज-तर्रार पुलिस निरीक्षक ने खुद फर्जी ग्राहक बनकर आरोपियों से संपर्क साधना शुरू किया। जैसे ही आरोपियों को लगा कि उन्हें मालामाल करने वाला कोई बड़ा खरीदार मिल गया है, उन्होंने तुरंत मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता से संपर्क किया। इसके बाद गुप्ता के इशारे पर राजीव कुमार और आकाश कुमार को लीक हुए प्रश्नपत्रों के चार सेट सौंप दिए गए। भिवंडी के एक स्थानीय होटल में पहले से ही जाल बिछाकर बैठी पुलिस ने जैसे ही इन सौदागरों को पेपर बेचते हुए रंगे हाथों पकड़ा, वैसे ही इस संगठित अपराध की परतें एक-एक करके उखड़ने लगीं। इस मामले में अब तक कुल सात मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं, जिनमें से तीन नए नाम कपिल दहिया, मिथुन सिंह और सोनू सिंह भी शामिल हैं जिन्हें अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
सहयोगियों का ताना-बाना और पुलिस की सख्त कार्रवाई
जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ा, वैसे-वैसे मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता के अन्य मददगारों के चेहरे भी बेनकाब होने लगे। एसआईटी (SIT) की टीम ने पंजाब के पठानकोट से वांटेड आरोपी कपिल दहिया को दबोच लिया, जिस पर कोंगांव इलाके में लीक पेपर के संभावित खरीदारों को तलाशने की मुख्य जिम्मेदारी थी। इसके अलावा, पुलिस ने मास्टरमाइंड को भगाने और छिपाने में मदद करने के जुर्म में उसके साले मिथुन सिंह को पटना से और हाजीपुर में फोटोकॉपी की दुकान चलाने वाले सोनू सिंह को उसकी ही दुकान से गिरफ्तार किया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सोनू सिंह ही बिजेंद्र के कहने पर उसकी फर्जी पहचान पत्र तैयार करता था और लीक हुए दस्तावेजों की ढेरों प्रतियां अपनी मशीन से निकालकर बाजार में सर्कुलेट करता था। यहां तक कि मास्टरमाइंड की पत्नी सुमन कुमारी पर भी यह गंभीर आरोप है कि उसने ऐप-आधारित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अपने फरार पति को पुलिस की हर गतिविधि की पल-पल की जानकारी दी और जांच एजेंसी का सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते उसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुराने आपराधिक इतिहास और गिरोह का काला चिट्ठा
महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक का यह मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि उसका पुराना आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक रहा है। पुलिस की अब तक की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि बिजेंद्र देश के कई अन्य राज्यों में भी पहले कई बार पेपर लीक कराने वाले बड़े गिरोहों का हिस्सा रह चुका है। इसके अलावा, वह एक हत्या के संगीन मामले में भी पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है। उसका पुराना तौर-तरीका यह रहा है कि वह पुलिस के शिकंजे में आने के बाद कुछ समय जेल काटता था, फिर जमानत पर बाहर आते ही अपनी पहचान बदलकर किसी दूसरे राज्य में छुपकर इस प्रकार के अवैध गोरखधंधों को दोबारा अंजाम देना शुरू कर देता था। फिलहाल, भिवंडी पुलिस सभी पकड़े गए आरोपियों से गहनता से पूछताछ कर रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचकर इसमें शामिल अन्य सफेदपोश चेहरों और खरीदारों को भी जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
