देश की राजनीति में अचानक एक बड़े सियासी घटनाक्रम ने हलचल तेज कर दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल का एक प्रमुख चेहरा और वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार भी कर लिया है। राष्ट्रपति भवन से आधिकारिक पुष्टि होते ही राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म हो गया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि अचानक उन्हें केंद्र सरकार की कैबिनेट से अलग होना पड़ा?
क्या दिल्ली से पंजाब की ओर मुड़ेगा रुख?
सूत्रों से मिल रही अंदरूनी जानकारी के मुताबिक, रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा किसी राजनीतिक नाराजगी का नतीजा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। दरअसल, आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी आलाकमान उन्हें राज्य की राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहा है। काफी समय से पार्टी के भीतर इस बात पर मंथन चल रहा था कि बिट्टू को केंद्रीय भूमिका से मुक्त करके पंजाब की कमान थमाई जाए, ताकि वहां पार्टी के जनाधार को और ज्यादा मजबूती दी जा सके।
चुनाव में मिल सकती है बेहद अहम जिम्मेदारी
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में पार्टी को एक मजबूत और जनाधार वाले स्थानीय चेहरे की सख्त जरूरत थी। रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के सियासी समीकरणों को बहुत गहराई से समझते हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उन्हें आगामी चुनाव में कोई बहुत बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। इतना ही नहीं, वह खुद भी राज्य की किसी हाई-प्रोफाइल सीट से मैदान में उतर सकते हैं, जिससे चुनाव का पूरा रुख पार्टी के पक्ष में मोड़ा जा सके।
आने वाले दिनों में और तेज होगी पंजाब की सियासत
इस बड़े फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ आना तय माना जा रहा है। लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर अब विराम लग गया है और यह साफ हो गया है कि आलाकमान का पूरा ध्यान अब पंजाब फतह करने पर केंद्रित है। रवनीत सिंह बिट्टू का केंद्रीय मंत्री पद छोड़कर राज्य के चुनावी समर में उतरना विरोधियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी उन्हें आधिकारिक तौर पर क्या नया पद या जिम्मेदारी सौंपती है।
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