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‘ये मजदूर का हाथ है…’ कलेक्ट्रेट में कुल्हाड़ी लेकर घुसा युवक और देने लगा धमकियां, पर जब सामने आया सच तो उड़ गए सबके होश!

लखीमपुर कलेक्ट्रेट में कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे एक शख्स ने 'घायल' स्टाइल में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुंकार भरी। जानिए आखिर इस फिल्मी ड्रामे के पीछे की क्या है असली कहानी और पड़ोसियों का खौफनाक सच!

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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिला कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त अचानक हड़कंप मच गया, जब एक शख्स खुलेआम एक हाथ में धारदार कुल्हाड़ी और दूसरे हाथ में प्रार्थनापत्रों से भरा थैला लेकर सीधे जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के बाहर जा पहुंचा। कुल्हाड़ी जैसे घातक हथियार को इस तरह सार्वजनिक जगह पर लहराते देख कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद फरियादियों और कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए। इस शख्स की पहचान जिले के सिंगाही थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भैरमपुर गांव निवासी राम सिंह के रूप में हुई। राम सिंह का यह कोई आम विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि उसने कलेक्ट्रेट परिसर के बीचों-बीच खड़े होकर बाकायदा फिल्मी अंदाज में डायलॉगबाजी शुरू कर दी। उसने किसी आम नागरिक की तरह अधिकारियों के सामने गुहार लगाने के बजाय चिल्ला-चिल्लाकर पूरे प्रशासनिक तंत्र को ललकारना शुरू कर दिया। वहां मौजूद लोगों ने जब इस अजीबोगरीब मंजर को देखा, तो हर कोई हैरान रह गया। देखते ही देखते कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने अपने मोबाइल कैमरे ऑन कर लिए और इस घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है।

‘अच्छे-अच्छे अफसरों की सर्विस कर दूंगा’: खुद को बताया पृथ्वीराज चौहान का वंशज

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में राम सिंह न सिर्फ अपने हाथ में थमी कुल्हाड़ी का प्रदर्शन करता दिख रहा है, बल्कि अधिकारियों को खुलेआम चेतावनी भी दे रहा है। उसने खुद को महान योद्धा पृथ्वीराज चौहान का वंशज और एक बेबस मजदूर घोषित किया। मशहूर बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की फिल्म के संवादों की तर्ज पर दहाड़ते हुए उसने कहा कि “ये मजदूर का हाथ है कातिया…”, और फिर दावा किया कि वह सड़क किनारे गाड़ियों का पंक्चर जोड़ने की एक छोटी सी दुकान चलाता है। राम सिंह ने रौबदार लहजे में कहा कि भले ही वह पंक्चर बनाने का काम करता हो, लेकिन उसमें बड़े से बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की सर्विस सुधारने और उनका घमंड तोड़ने का पूरा दम है। उसने कलेक्ट्रेट परिसर में चिल्लाते हुए यह भी हुंकार भरी कि अगर देश से भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकना है, तो किसी न किसी को आज के दौर में भगत सिंह बनना ही पड़ेगा। उसकी यह बातें सुनकर शुरुआत में वहां मौजूद लोग उसे कोई बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा समझने लगे, लेकिन इस फिल्मी ड्रामे के पीछे का असली सच कुछ और ही निकला।

नाटकीय दावों के पीछे का कड़वा सच: पड़ोसियों के आंसुओं ने खोली पोल

जैसे ही यह ‘फिल्मी हीरो’ वाला वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना, स्थानीय सिंगाही थाना पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। पुलिस ने जब कलेक्ट्रेट में हंगामा करने वाले राम सिंह की पृष्ठभूमि और इस पूरे विवाद की गहराई से जांच की, तो एक बेहद चौंकाने वाली सच्चाई उजागर हुई। पुलिस की तफ्तीश में यह बात साफ हुई कि राम सिंह का यह हाई-प्रोफाइल ड्रामा किसी बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके अपने ही पड़ोसियों के साथ चल रहे एक मामूली जमीनी विवाद से जुड़ा था। अपनी खुद की गलतियों पर पर्दा डालने और पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए उसने इस तरह के फिल्मी हथकंडे का सहारा लिया था। पुलिस ने मामले का दूसरा पहलू जनता के सामने लाने के लिए राम सिंह के पड़ोसियों का भी एक बयान जारी किया। राम सिंह के पड़ोसी पैकरमा ने मीडिया और पुलिस के सामने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि राम सिंह खुद गांव में भारी उपद्रव मचाता है। उसने आम रास्ते पर एक बड़ा गड्ढा खोद रखा है और जब भी कोई ग्रामीण या पड़ोसी इसका विरोध करता है, तो वह कुल्हाड़ी दिखाकर जान से मारने की धमकियां देता है।

गालियों की बौछार और दुकानदारों का उत्पीड़न: आखिर क्या है असली विवाद?

राम सिंह के इस कथित ‘क्रांतिकारी’ रूप का पर्दाफाश करते हुए पीड़ित पड़ोसी पैकरमा की पत्नी सुंदरी ने भी अपनी आपबीती सुनाई। सुंदरी के मुताबिक, राम सिंह का असली मकसद गांव में अपना खौफ कायम करना है। उसने उनकी दुकान के ठीक सामने गहरा गड्ढा खोद रखा है, जिससे न केवल उनकी दुकान का मुख्य रास्ता बंद हो गया है, बल्कि नाली के गंदे पानी की निकासी भी पूरी तरह से रुक गई है। सुंदरी ने रोते हुए आरोप लगाया कि जब भी वह अपनी दुकान पर बैठती हैं या कोई ग्राहक सामान खरीदने आता है, तो राम सिंह अपनी सीमाएं लांघते हुए उन्हें और ग्राहकों को बेहद भद्दी और गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर देता है। उसकी इस प्रताड़ना के डर से अब ग्राहकों ने दुकान पर आना बंद कर दिया है, जिससे उनका परिवार आर्थिक तंगी का शिकार हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जो शख्स कलेक्ट्रेट जाकर खुद को भगत सिंह बता रहा है, वह असल जिंदगी में अपने ही पड़ोसियों के लिए आफत बना हुआ है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की वैधानिक जांच कर रही है और सरकारी परिसर में बिना अनुमति धारदार हथियार ले जाकर शांति भंग करने के आरोप में राम सिंह पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

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