दिल्ली में हाल ही में हुए CJP के ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर अब एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। इस प्रदर्शन से जुड़ी एक जनहित याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे संगठन सक्रिय थे जिन्हें कथित रूप से विदेशी फंडिंग मिलती है। याचिका में दावा किया गया है कि इन तत्वों की मौजूदगी के कारण शांतिपूर्ण प्रदर्शन का माहौल बिगड़ा और हिंसा की घटनाएं सामने आईं। अदालत ने इस याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की सहमति दे दी है। अब इस मामले पर शुक्रवार, 24 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है। कोर्ट के इस फैसले के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
याचिका में NIA जांच समेत कई गंभीर मांगें
जनहित याचिका में मांग की गई है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि CJP प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक और राजनीतिक तत्वों ने कथित तौर पर स्थिति को हिंसक बना दिया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मार्च के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई, पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया। इसके अलावा संसद की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश किए जाने का भी दावा किया गया है। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग अदालत के सामने रखी गई है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहले लाठीचार्ज मामले में भी पहुंचा था विवाद कोर्ट
इस पूरे घटनाक्रम से पहले छात्रों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज का मामला भी दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा था। उस समय तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को निर्धारित तारीख पर सूचीबद्ध किया था। बाद में सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शन स्थल से जुड़े सीसीटीवी कैमरों और पुलिस के बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर में तय की गई है।
अदालत की सुनवाई पर टिकी सभी की नजरें
अब विदेशी फंडिंग और कथित हिंसा से जुड़े आरोपों वाली नई जनहित याचिका पर होने वाली सुनवाई को लेकर सभी की नजरें दिल्ली हाई कोर्ट पर हैं। अदालत यह तय करेगी कि याचिका में लगाए गए आरोपों पर आगे किस प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता है। फिलहाल यह मामला न्यायिक विचाराधीन है और किसी भी आरोप की पुष्टि अदालत या जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही होगी। इस बीच प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की समीक्षा कर रही हैं। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट इस मामले की दिशा तय कर सकती है।
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