सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समारदुंग सुरंग में हुआ हादसा पूरे देश को झकझोर देने वाला है। सोमवार दोपहर अचानक हुए लैंडस्लाइड के बाद सुरंग का प्रवेश मार्ग बंद हो गया, जिससे अंदर काम कर रहे कई मजदूर बाहर नहीं निकल सके। प्रशासन के अनुसार अब तक 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि राहत एजेंसियों का मानना है कि अभी भी कई मजदूर सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं। सही संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। घटना के बाद से ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सिक्किम पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि बाकी मजदूरों तक जल्द पहुंचा जा सके।
मीथेन गैस का रिसाव बना सबसे बड़ी चुनौती
बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी परेशानी सुरंग के भीतर हो रहा मीथेन गैस का रिसाव है। अधिकारियों के अनुसार गैस की मात्रा अधिक होने के कारण अंदर जाना बेहद जोखिम भरा हो गया है। कई बचावकर्मी सुरंग में प्रवेश करने के दौरान चक्कर आने से बेहोश भी हो गए, जिसके बाद उन्हें तुरंत बाहर निकालकर इलाज के लिए भेजा गया। विशेष सुरक्षा उपकरणों और गैस मॉनिटरिंग सिस्टम की मदद से अब चरणबद्ध तरीके से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश भी अभियान को प्रभावित कर रही है। इसके बावजूद राहत दल बिना रुके काम कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि बचावकर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही हर कदम उठाया जा रहा है, ताकि किसी और की जान जोखिम में न पड़े।
कैसे हुआ हादसा, सामने आई शुरुआती जानकारी
जानकारी के अनुसार यह सुरंग तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है, जिसका निर्माण पटेल इंजीनियरिंग द्वारा किया जा रहा है। सोमवार दोपहर करीब 3 बजकर 9 मिनट पर अचानक सुरंग के भीतर लैंडस्लाइड हुआ, जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। बाहर निकलने का रास्ता बंद होने से कई मजदूर अंदर ही फंस गए। हादसे से बचकर बाहर आए कुछ मजदूरों ने बताया कि उन्होंने सुरंग के अंदर तेज धमाके जैसी आवाज सुनी थी। इसके कुछ ही क्षण बाद मिट्टी और मलबा गिरने लगा, जिससे अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया। शुरुआती स्तर पर पुलिस और अग्निशमन विभाग ने बिना विशेष उपकरणों के अंदर जाने की कोशिश की, लेकिन खतरनाक परिस्थितियों के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
प्रशासन की निगरानी में राहत कार्य
हादसे के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को राहत कार्य में किसी भी प्रकार की कमी न रहने के निर्देश दिए हैं। मृत मजदूरों के शवों को अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया है, जबकि घायलों का इलाज जारी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) भी पूरे अभियान की निगरानी कर रहा है। विशेषज्ञों की टीम सुरंग के भीतर गैस के स्तर और संरचना की लगातार जांच कर रही है ताकि बचाव अभियान सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सके। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंग में फंसे सभी लोगों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। पूरे देश की नजर अब इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई है और सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद की जा रही है।
