उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह जिला जेल एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है पति की हत्या के अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार तीन महिलाओं का एक ही जेल में होना। पहले से चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड की आरोपी मुस्कान इस जेल में बंद है। अब हस्तिनापुर के चर्चित मामले में गिरफ्तार दामिनी को भी इसी जेल में भेजा गया है। वहीं, बहसूमा क्षेत्र के पुराने मामले की आरोपी बबीता भी इसी जेल में बंद है। तीनों मामलों में महिलाओं पर अपने-अपने पतियों की हत्या की साजिश रचने के आरोप हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन मामलों की जांच और अदालत की सुनवाई की प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला अदालत ही सुनाएगी।
अलग-अलग मामले, लेकिन आरोप एक जैसे
मुस्कान का मामला उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना था, जब उस पर अपने पति की हत्या कर शव को नीले ड्रम में छिपाने का आरोप लगा। पुलिस के अनुसार, इस मामले में प्रेम संबंधों की भी जांच की गई थी। वहीं, हस्तिनापुर की रहने वाली दामिनी पर आरोप है कि उसने अपने पति की हत्या की साजिश अपने कथित प्रेमी के साथ मिलकर रची। जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि हत्या में सांप का इस्तेमाल किया गया। इसी तरह बहसूमा के मामले में बबीता पर भी अपने पति की हत्या कराने का आरोप है। तीनों मामलों में पुलिस ने सबूतों के आधार पर कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। फिलहाल सभी मामलों की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
जेल प्रशासन की निगरानी में हैं सभी आरोपी
जेल प्रशासन के अनुसार, तीनों महिलाओं को नियमों के अनुसार रखा गया है और उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जेल में महिला बंदियों के लिए अलग व्यवस्था है और सभी कैदियों के साथ जेल नियमों के अनुसार व्यवहार किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जेल प्रशासन का काम केवल अदालत के आदेशों का पालन करना है। वहीं पुलिस अपनी-अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है और अदालत में साक्ष्य पेश किए जा रहे हैं। किसी भी आरोपी को दोषी या निर्दोष घोषित करने का अधिकार केवल अदालत के पास है। इसलिए इन मामलों में अंतिम फैसला आने तक सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
लगातार सामने आ रहे मामलों ने बढ़ाई चिंता
मेरठ और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में पति-पत्नी के रिश्तों से जुड़े कई गंभीर आपराधिक मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं ने समाज में रिश्तों में बढ़ते विवाद और अपराध को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान कानून और बातचीत से होना चाहिए, न कि हिंसा के रास्ते से। पुलिस का कहना है कि हर मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। वहीं लोग भी इन मामलों के अंतिम न्यायिक फैसले का इंतजार कर रहे हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक विवाद जब अपराध का रूप ले लेते हैं, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है।
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