संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर राजनीतिक और छात्र आंदोलन का बड़ा केंद्र बन गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से घोषित ‘संसद चलो’ मार्च शुरू होने से पहले संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मार्च बनने जा रहा है और लोगों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि देशभर के नागरिक अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। दीपके ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों में लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशें हुईं, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन ने लोगों में फिर से भरोसा जगाया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र, युवा और आम नागरिक इस आंदोलन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे हैं।
केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के गेट बंद
प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। संसद भवन की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक जवानों की तैनाती की गई है। इसी बीच केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए, जिससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में स्टेशन के बाहर सुरक्षा कर्मियों की भारी मौजूदगी दिखाई दी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि संसद सत्र और आसपास के क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनी रहे। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 भी लागू है, जिसके तहत बिना अनुमति बड़े जमावड़े और जुलूस पर रोक है।
चंद्रशेखर आजाद ने पहुंचकर दिया समर्थन
आंदोलन को उस समय और चर्चा मिली जब आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इससे पहले भी वह इस आंदोलन के समर्थन में धरना स्थल पर पहुंच चुके हैं। उनके आने के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला। इस बीच अभिजीत दीपके ने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने और किसी भी तरह के उकसावे से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है और सभी प्रदर्शनकारी कानून का सम्मान करते हुए अपनी आवाज उठाएं।
सरकार पर जवाबदेही की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी का यह आंदोलन मुख्य रूप से छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। संगठन की प्रमुख मांगों में NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया में देरी, बढ़ती बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे क्या स्थिति बनती है और क्या इन मांगों पर कोई ठोस पहल देखने को मिलेगी।
