रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर में बने कुछ निर्माणों को लेकर नोटिस जारी किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्राधिकरण ने निर्माण कार्यों को नियमों के विपरीत बताते हुए संबंधित पक्ष को जवाब देने के लिए समय दिया है। इस कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को लेकर सरकार का रवैया पक्षपातपूर्ण दिखाई देता है। उनके बयान के बाद यह मुद्दा सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार शिक्षा और शैक्षणिक संस्थानों को लेकर गलत संदेश दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, जबकि अन्य मामलों में अलग रवैया अपनाया जाता है। बिना किसी संगठन का नाम लिए उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विभिन्न संस्थाओं और भवनों की वैधता की समान रूप से जांच क्यों नहीं की जाती। सपा प्रमुख का कहना है कि यदि नियमों का पालन कराना ही उद्देश्य है तो सभी संस्थानों के लिए एक जैसा मापदंड होना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है और समर्थक तथा विरोधी दोनों पक्ष अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
सपा नेताओं ने भी उठाए कई सवाल
इस मामले में समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की है। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि प्रदेश के अनेक बड़े शिक्षण संस्थान वर्षों से संचालित हो रहे हैं और उनके निर्माण से जुड़े मामलों की भी समीक्षा होनी चाहिए। उनका आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी का नाम आते ही प्रशासन अधिक सक्रिय दिखाई देता है। वहीं सपा नेताओं ने इसे राजनीतिक दृष्टि से प्रेरित कार्रवाई बताया है। हालांकि सरकार या प्रशासन की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों और दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है तथा सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
जौहर यूनिवर्सिटी को मिला जवाब देने का मौका
रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि वह निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करेगा। आजम खान की पत्नी और यूनिवर्सिटी से जुड़ी डॉ. तजीन फातिमा ने भी कहा है कि उन्हें नोटिस मिला है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन क्या जवाब देता है और उसके बाद प्राधिकरण क्या फैसला लेता है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
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