रोजाना की भागदौड़ में जब आप जयपुर के किसी व्यस्त चौराहे पर लाल बत्ती (रेड लाइट) पर खड़े होकर अपनी घड़ी की सुइयां देखते हैं, तो दिल यही कहता है कि काश! यह जाम जादू से गायब हो जाए। आपका यह सपना अब हकीकत में बदलने जा रहा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर अब एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। शहर की धड़कन कहे जाने वाले चौराहों से अब वह पुराना ढर्रा खत्म होने वाला है, जहां बिना किसी वाहन के भी खाली सड़क पर आपको सिर्फ इसलिए रुकना पड़ता था क्योंकि ‘फिक्स टाइमर’ अभी लाल था। जयपुर ट्रैफिक पुलिस एक ऐसी तकनीक को जमीन पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके आने के बाद शहर की ट्रैफिक लाइटें अब इंसानी दिमाग की तरह खुद फैसला ले सकेंगी।
तकनीक का वह जादुई ‘तीसरा नेत्र’ जो पलक झपकाते ही बदलेगा रास्ता
इस नई व्यवस्था के पीछे जो सबसे बड़ी ताकत काम कर रही है, उसे हम इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) कहते हैं। यह सिस्टम पारंपरिक लाइटों की तरह समय का गुलाम नहीं है। आसान शब्दों में समझें तो अब चौराहों पर लगे विशेष कैमरे लगातार हर सड़क पर मौजूद गाड़ियों की कतारों को नापेंगे। मान लीजिए कि जेएलएन मार्ग से टोंक रोड जाने वाली सड़क पर अचानक वाहनों का हुजूम उमड़ पड़ता है, तो यह सिस्टम तुरंत उस तरफ की ग्रीन लाइट का समय अपने आप बढ़ा देगा। इसके विपरीत, जिस तरफ कोई वाहन नहीं होगा या बहुत कम गाड़ियां होंगी, वहां की बत्ती तुरंत लाल हो जाएगी ताकि दूसरी तरफ के लोगों को बेजह इंतजार न करना पड़े। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई अदृश्य पुलिसकर्मी खुद खड़े होकर हर पल की स्थिति देखकर हाथ से इशारा कर रहा हो।
जब 39 दिनों के एक गुप्त प्रयोग ने बदल दी शहर की हवा
इस पूरी व्यवस्था को सीधे जनता के बीच उतारने से पहले जयपुर के सबसे व्यस्त रामबाग सर्किल पर 39 दिनों का एक बहुत ही वैज्ञानिक ट्रायल किया गया। 3 जून से लेकर 11 जुलाई तक चले इस परीक्षण के जो परिणाम सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं। इस अवधि के दौरान बिना किसी मानवीय दखल के करीब 4.88 लाख वाहनों को बेहद सुगमता से निकाला गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि हर वाहन चालक का चौराहे पर रुकने का समय 8 से लेकर 45 सेकंड तक कम हो गया। सिर्फ समय ही नहीं बचा, बल्कि गाड़ियां स्टार्ट खड़ी रहने से होने वाले प्रदूषण में भी भारी गिरावट देखी गई। इस ट्रायल के दौरान करीब 2,535 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) जैसी हानिकारक गैस का उत्सर्जन कम दर्ज किया गया, जो पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ी राहत है।
नियम तोड़ने वालों की अब खैर नहीं, सीधे घर पहुंचेगा संदेश
इस तकनीक की खूबियां सिर्फ ट्रैफिक को सुचारू बनाने तक ही सीमित नहीं हैं। यह सिस्टम शहर की सुरक्षा और यातायात नियमों का पालन करवाने में भी मील का पत्थर साबित होगा। यदि कोई वाहन चालक जोश में आकर लाल बत्ती पार करता है, गलत दिशा में गाड़ी चलाता है या तय सीमा से अधिक तेज रफ्तार में निकलता है, तो तीसरी आंख की नजर से वह बच नहीं पाएगा। यह एआई सिस्टम बिना किसी देरी के नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान कर सीधे कंट्रोल रूम को रिपोर्ट भेजेगा। यही नहीं, यदि उस गाड़ी का कोई पुराना चालान भी बकाया है, तो उसकी जानकारी भी तुरंत सामने आ जाएगी। आने वाले समय में इसे इस तरह अपग्रेड किया जाएगा कि यदि कोई एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड चौराहे के करीब आएगी, तो उसके लिए रास्ता खुद-ब-खुद साफ यानी ‘ग्रीन कॉरिडोर’ में बदल जाएगा।
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