पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर से एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। 12 साल की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत और हत्या के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने एक मुठभेड़ (एनकाउंटर) में ढेर कर दिया है। यह पूरी घटना तब घटी जब पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी को लेकर वारदात वाली जगह पर साक्ष्य जुटाने और क्राइम सीन को रीक्रिएट करने गई थी। पुलिस के मुताबिक, मौका पाते ही आरोपी ने कानून के रखवालों को चकमा देने की कोशिश की और एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर फायरिंग कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
तारीख 8 जुलाई, वक्त रात के 12:45 बजे: आधी रात के उस ऑपरेशन की पूरी कहानी
बरुईपुर जिला पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस खौफनाक मामले की जांच कर रहे अधिकारी 8 जुलाई की रात करीब 12:45 बजे आरोपी प्रभाष मंडल को लेकर सूर्यापुर स्थित उसी तालाब और सुनसान इलाके में पहुंचे थे, जहां बच्ची का शव मिला था। पुलिस का मकसद यह समझना था कि आरोपियों ने इस घिनौने अपराध को कैसे अंजाम दिया। लेकिन पुलिस अभी सीन रीक्रिएट करने की तैयारी कर ही रही थी कि अचानक प्रभाष मंडल ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। उसने झपट्टा मारकर एक सुरक्षाकर्मी का हथियार छीन लिया और भागने की नीयत से पुलिस टीम पर एक राउंड गोली चला दी। पुलिस ने उसे सरेंडर करने को कहा, लेकिन जब उसने दोबारा हमला करना चाहा, तो पुलिस की जवाबी फायरिंग में वह ढेर हो गया।
शुभेंदु सरकार की एसआईटी और वो डिजिटल सबूत, जिसने खोली थी साजिश की परतें
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए शुभेंदु सरकार ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी की तफ्तीश में जो बातें सामने आईं, वे रोंगटे खड़े करने वाली थीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह कोई अचानक घटी घटना नहीं थी, बल्कि इस पूरी वारदात को एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। एसआईटी को जांच के दौरान बेहद अहम डिजिटल सबूत मिले थे। पुलिस ने जब प्रभाष मंडल और उसके दो अन्य सहयोगियों के मोबाइल फोन को ट्रैक किया, तो 4 जुलाई की शाम 4:30 बजे से लेकर रात 11:00 बजे तक तीनों की टावर लोकेशन एक ही सुनसान जगह पर पाई गई। यही वह समय था जब मासूम बच्ची लापता हुई थी और उसके साथ दरिंदगी की गई थी।
मासूम की गुमशुदगी से लेकर इंसाफ के इस मोड़ तक, जानिए क्या था पूरा मामला
यह दिल दहला देने वाला मामला 4 जुलाई की शाम को शुरू हुआ था, जब महज 12 साल की एक मासूम बच्ची अचानक अपने घर के पास से लापता हो गई थी। परिजनों ने रातभर उसकी तलाश की, लेकिन उसका कहीं सुराग नहीं मिला। अगले दिन यानी 5 जुलाई को बरुईपुर के एक स्थानीय तालाब में बच्ची का शव तैरता हुआ मिला, जिसके बाद पूरे इलाके में भारी जनाक्रोश फैल गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शुरुआती जांच में इस बात की पुष्टि हुई थी कि बच्ची के साथ पहले सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उसकी बेरहमी से हत्या कर शव को तालाब में फेंक दिया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को दबोचा था, जिसमें से मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल अब पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है।
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