Homeदेश18 साल बाद आया बड़ा फैसला! आखिर क्यों 38 दोषियों की फांसी...

18 साल बाद आया बड़ा फैसला! आखिर क्यों 38 दोषियों की फांसी की सजा पर हाईकोर्ट ने लगाई मुहर?

गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। जानिए पूरे मामले की टाइमलाइन, कोर्ट का फैसला और पीड़ितों को मिले मुआवजे की पूरी जानकारी।

-

2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने विशेष अदालत द्वारा 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा में भी कोई बदलाव नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सभी दोषियों को पहले सुनाई गई सजा ही भुगतनी होगी। अदालत ने पीड़ित परिवारों को राहत देते हुए मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। इस फैसले को देश के सबसे चर्चित आतंकवादी मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय माना जा रहा है।

क्या था अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामला?

26 जुलाई 2008 की शाम अहमदाबाद शहर में कुछ ही मिनटों के अंतर पर कई जगह बम धमाके हुए थे। ये धमाके बाजारों, बस स्टैंड, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में किए गए थे। इन हमलों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। धमाकों के बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई थी। जांच में सामने आया कि हमले की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन नाम के आतंकी संगठन ने ली थी। सबसे दर्दनाक बात यह थी कि जब घायलों को अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब अस्पताल के बाहर भी विस्फोट किया गया, जिससे बचाव कार्य भी प्रभावित हुआ।

लंबी जांच और कई साल तक चली सुनवाई

इस मामले की जांच काफी बड़े स्तर पर की गई थी। जांच एजेंसियों ने हजारों पन्नों के दस्तावेज अदालत में पेश किए और 1100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई के दौरान कई साल बीत गए और इस बीच अलग-अलग जजों ने मामले की सुनवाई की। आखिरकार फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 49 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 लोगों को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जबकि 28 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को सही माना है और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।

देश के सबसे बड़े आतंकी मामलों में शामिल

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट को भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है। धमाकों के बाद गुजरात पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) बनाकर कई राज्यों में छापेमारी की थी। जांच के दौरान आतंकियों के नेटवर्क का खुलासा हुआ और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के अनुसार, अहमदाबाद के अलावा सूरत में भी बम लगाए गए थे, लेकिन वे फट नहीं पाए। यह मामला इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि एक ही केस में इतनी बड़ी संख्या में दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है, हालांकि दोषियों के पास अभी भी सुप्रीम कोर्ट में अपील का कानूनी अधिकार मौजूद है।

Read More-जिस देश से कभी हुई थी 8 साल की जंग, आखिर वहीं क्यों ले जाया जा रहा है खामेनेई का पार्थिव शरीर?

 

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts