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योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला! UP के इस मशहूर कस्बे का नाम बदलकर किया परशुराम पुरी

योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुराम पुरी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। साथ ही उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 समेत 29 अहम प्रस्तावों पर भी मुहर लगी। जानिए कैबिनेट के बड़े फैसलों की पूरी जानकारी।

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उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 29 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा शाहजहांपुर के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर परशुराम पुरी करने के फैसले की हो रही है। लंबे समय से इस नाम परिवर्तन की मांग की जा रही थी, जिसे अब कैबिनेट की अंतिम स्वीकृति मिल गई है। इसके अलावा सरकार ने राज्य में उद्योग, रोजगार और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।

जलालाबाद से परशुराम पुरी बनने तक का सफर

जलालाबाद का नाम बदलने की प्रक्रिया कोई नई नहीं है। इसकी शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, जब नगर पालिका परिषद ने पहली बार इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद वर्ष 2023 में भी बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को दोबारा मंजूरी दी गई। जिला प्रशासन ने अपनी सिफारिश के साथ इसे राज्य सरकार को भेजा और फिर केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य कैबिनेट ने भी इस पर अंतिम मुहर लगा दी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। यहां उनका एक प्राचीन मंदिर भी मौजूद है, जिसके कारण इस क्षेत्र का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व काफी अधिक माना जाता है।

पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है नया नाम

सरकार का कहना है कि कई धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय परंपराओं में इस स्थान को भगवान परशुराम की जन्मभूमि बताया गया है। इसी आधार पर वर्ष 2022 में इसे आधिकारिक रूप से परशुराम जन्मभूमि के रूप में मान्यता दी गई थी। अब नाम बदलकर परशुराम पुरी किए जाने के बाद इस स्थान की नई पहचान धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से और मजबूत होगी। वहीं, जलालाबाद नाम को लेकर यह भी माना जाता है कि इसका संबंध मुगल शासक जलालुद्दीन अकबर के नाम से था। हालांकि इस संबंध में अलग-अलग ऐतिहासिक मत मौजूद हैं। सरकार का कहना है कि नया नाम स्थानीय आस्था और ऐतिहासिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर तय किया गया है।

स्टार्टअप नीति-2026 से युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा

कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई। यह नीति अगले पांच वर्षों तक लागू रहेगी और इसका उद्देश्य प्रदेश में नए स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को आर्थिक और तकनीकी सहायता देना है। सरकार चाहती है कि उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख स्टार्टअप राज्यों में शामिल हो। नई नीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक, बायोटेक, फिनटेक और अन्य आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत नए उद्यमियों को शुरुआती फंडिंग, प्रशिक्षण, मेंटरशिप और कारोबार बढ़ाने में मदद दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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