यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट से एक बार फिर राहत मिली है। अदालत ने उनके इलाज के लिए दी गई अवधि को एक महीने और बढ़ाने की अनुमति दे दी है। फिलहाल उनका इलाज जोधपुर के एक आयुर्वेदिक अस्पताल में चल रहा है। आसाराम की ओर से अदालत में आवेदन देकर कहा गया था कि उनका उपचार अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए इलाज जारी रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। साथ ही राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया है।
पहले जेल लौटना पड़ा, फिर इलाज की मिली अनुमति
आसाराम को पिछले महीने अंतरिम राहत खत्म होने के बाद दोबारा जेल जाना पड़ा था। करीब दो साल तक अलग-अलग आधारों पर उनकी अंतरिम राहत बढ़ाई जाती रही, लेकिन 2 जून को अदालत ने इसे आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अदालत से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति मांगी। अदालत ने इलाज की इजाजत दी, जिसके बाद से उनका उपचार जोधपुर के आरोग्यं अस्पताल में चल रहा है। अब इलाज जारी रखने के लिए उन्हें एक महीने का अतिरिक्त समय भी मिल गया है।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली अंतरिम जमानत
हाई कोर्ट से राहत मिलने से एक दिन पहले आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था। उन्होंने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत देने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है तो इस आधार पर दोबारा जल्द सुनवाई की मांग की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इलाज में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी जाएगी।
सरकार से मांगी गई स्वास्थ्य रिपोर्ट
राजस्थान सरकार ने अदालत को बताया कि अस्पताल में हुई जांच के दौरान आसाराम की स्थिति स्थिर पाई गई थी और उनकी जान को तत्काल कोई खतरा नहीं है। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने सरकार को उनके स्वास्थ्य की ताजा रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। फिलहाल आसाराम का इलाज जारी रहेगा और अगली सुनवाई के दौरान अदालत मेडिकल रिपोर्ट और सरकार के जवाब के आधार पर आगे का फैसला करेगी। इस मामले पर सभी की नजरें बनी हुई हैं क्योंकि कानूनी प्रक्रिया और स्वास्थ्य संबंधी दावों पर आगे भी अदालत को फैसला लेना है।
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