असम की राजधानी गुवाहाटी में पुलिस ने सोने की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 38 किलोग्राम सोने के बिस्किट बरामद किए हैं। बरामद सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 54 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई खारघुली इलाके में विशेष अभियान के दौरान की गई। लंबे समय से मिल रही खुफिया सूचनाओं और लगातार निगरानी के बाद पुलिस ने संदिग्ध खेप को बीच रास्ते में रोक लिया। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में सोने के बिस्किट मिले, जिसके बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने पूरी खेप को जब्त कर लिया। हाल के वर्षों में असम में यह सोना बरामद होने की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जा रही है।
एक आरोपी गिरफ्तार, लेकिन जांच अभी जारी
इस मामले में पुलिस ने अक्षय बंसुरे नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। हालांकि पुलिस ने आरोपी के बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और जांच अभी शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण चरण में है। इसलिए किसी भी तरह की जानकारी सार्वजनिक करने से जांच प्रभावित हो सकती है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपी इस नेटवर्क में किस भूमिका में था और उसके संपर्क किन लोगों से जुड़े हुए हैं।
सोना कहां से आया और कहां जाना था?
गुवाहाटी पूर्व की पुलिस उपायुक्त संभावी मिश्रा ने बताया कि यह सफलता लगातार खुफिया जानकारी जुटाने और कई सुरागों पर लंबे समय तक काम करने का नतीजा है। उन्होंने पुष्टि की कि जब्त किए गए सभी बिस्किट शुद्ध सोने के हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना कहां से लाया गया था और इसे किस जगह पहुंचाया जाना था। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस मामले का संबंध किसी बड़े और संगठित तस्करी गिरोह से हो सकता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है।
पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अब सिर्फ गिरफ्तार आरोपी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच में संभावित सीमा मार्गों, पैसों के लेन-देन और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। पुलिस का मानना है कि जब तक पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं हो जाता, तब तक जांच जारी रहेगी। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद ही पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
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