बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। इस बार विवाद किसी कानूनी सुनवाई को लेकर नहीं, बल्कि स्मारक निर्माण को लेकर सामने आया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में जिस स्थान पर भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई थी, वहीं उनके परिजन और गांव के लोग स्मारक बनाना चाहते थे। इसके लिए ईंट, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री भी मौके पर पहुंचा दी गई थी। जैसे ही निर्माण की तैयारी शुरू हुई, प्रशासन की टीम वहां पहुंच गई और काम रुकवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन पर स्मारक बनाया जा रहा था, वह सरकारी भूमि है और बिना अनुमति वहां किसी भी तरह का स्थायी निर्माण नहीं किया जा सकता। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद गांव में चर्चा तेज हो गई है।
ग्रामीणों का दावा- भावनाओं से जुड़ा है स्मारक
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि भरत भूषण तिवारी की याद में एक स्मारक बनाना था। उनका मानना है कि जिस स्थान पर घटना हुई, वही जगह स्मृति स्थल के रूप में सबसे उपयुक्त है। इसी सोच के साथ गांव के लोगों ने आपसी सहयोग से निर्माण की तैयारी की थी। लेकिन अंचल अधिकारी आनंद प्रकाश ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य तत्काल रोकने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और बिना जिला प्रशासन की मंजूरी या अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) के वहां निर्माण नहीं किया जा सकता। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कानून के अनुसार ही संभव है।
परिजनों ने रखी नई मांग, वैकल्पिक जमीन देने की अपील
प्रशासन की कार्रवाई के बाद भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने अपनी नाराजगी जताई, लेकिन साथ ही समाधान का रास्ता भी सुझाया। परिवार का कहना है कि यदि विवादित स्थान पर स्मारक बनाना नियमों के खिलाफ है, तो प्रशासन किसी अन्य उपयुक्त स्थान की व्यवस्था करे। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि गांव के कई लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है। परिजनों का कहना है कि वे किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं करना चाहते, लेकिन भरत तिवारी की याद को संजोने के लिए एक स्मारक बनना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से इस संबंध में सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है ताकि विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।
प्रशासन ने कानून का हवाला दिया
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। भूमि की प्रकृति, स्वामित्व और सभी आवश्यक अनुमति मिलने के बाद ही किसी प्रकार का निर्माण किया जा सकता है। इसी वजह से निर्माण कार्य को रोका गया है। घटना की जानकारी फैलने के बाद आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे। कुछ लोगों ने प्रशासन के फैसले पर असहमति जताई, जबकि कई लोगों ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही। राहत की बात यह रही कि पूरे घटनाक्रम के दौरान माहौल शांतिपूर्ण बना रहा और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।
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