दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके का एक बयान विवादों में आ गया है। अभिजीत दिपके शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, NEET पेपर लीक, NTA में धांधली और SSC पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि “अगर मैं खालिद होता या मुसलमान होता, तो अब तक जेल में होता।” इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है और कई लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
जंतर-मंतर पर छात्रों के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन जारी
अभिजीत दिपके अमेरिका से लौटकर लगातार छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके इस आंदोलन को कई छात्रों और कुछ विपक्षी नेताओं का समर्थन भी मिल रहा है। प्रदर्शन में वे परिवार भी शामिल हो रहे हैं, जिनके बच्चों की मौत कथित पेपर लीक और परीक्षा तनाव से जुड़ी घटनाओं के बाद हुई थी। दिपके का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं और इसके कारण कई छात्र मानसिक दबाव का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।
पीड़ित परिवारों को लेकर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खो दिया है, उन्हें न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने कई छात्रों के नाम लेते हुए कहा कि उनके परिवारों से अब तक किसी सरकारी प्रतिनिधि ने संपर्क तक नहीं किया। उनका कहना है कि सरकार की ओर से संवेदनशीलता की कमी दिखाई दे रही है। दिपके ने यह भी कहा कि सरकार को कम से कम उन परिवारों से मिलकर दुख व्यक्त करना चाहिए, भले ही बच्चों को वापस नहीं लाया जा सकता। उनके इन आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर नई बहस खड़ी कर दी है।
सोनम वांगचुक का समर्थन और आंदोलन का बढ़ता असर
इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है। वे जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, जिससे यह आंदोलन और अधिक चर्चा में आ गया है। छात्रों और युवाओं की समस्याओं को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। हालांकि, दिपके के हालिया बयान ने इस पूरे आंदोलन को एक नए विवाद में भी फंसा दिया है। सोशल मीडिया पर लोग उनके बयान पर अलग-अलग राय दे रहे हैं—कुछ इसे सिस्टम पर सवाल उठाने वाला बयान बता रहे हैं, तो कुछ इसे विवादित और गैर-जिम्मेदाराना कह रहे हैं। फिलहाल आंदोलन और बयान दोनों ही सुर्खियों में बने हुए हैं।
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