पुणे के मशहूर 26 वर्षीय युवा व्यापारी केतन हत्याकांड में हर दिन नए और रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। इस खौफनाक मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी सुलझाने में अब उस टैक्सी ड्राइवर का बयान सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बन गया है, जो केतन और उसकी मंगेतर सिया गोयल को मुंबई एयरपोर्ट छोड़ कर आया था। ड्राइवर वैभव जाधव ने पुलिस के सामने जो गवाही दी है, उसने इस पूरे मामले को एक नया और बेहद पेचीदा मोड़ दे दिया है। वैभव के मुताबिक, यह सफर शुरुआत से ही सामान्य नहीं था। केतन और सिया के बीच रिश्ते में चल रही कड़वाहट और तनाव गाड़ी के भीतर साफ महसूस किया जा सकता था। जो मंगेतर कुछ घंटों बाद एक खूबसूरत प्री-वेडिंग शूट के लिए उड़ान भरने वाली थी, उसके चेहरे पर खुशी की जगह एक गहरा गुस्सा और अजीब सी छटपटाहट थी, जिसे ड्राइवर ने अपनी आंखों से देखा था।
भाई की जबरदस्ती और रावेत के रास्ते पर वो तीखी बहस
ड्राइवर वैभव जाधव ने पुलिस को बताया कि केतन और सिया का यह सफर बाली (इंडोनेशिया) में होने वाले उनके प्री-वेडिंग शूट के लिए तय हुआ था। इसके लिए उन्होंने पुणे से गाड़ी बुक की थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि सिया इस ट्रिप पर जाने के लिए कतई तैयार नहीं थी। वह इतनी आक्रामक थी कि उसने कार के भीतर बैठने से भी साफ मना कर दिया था। स्थिति को बिगड़ता देख सिया के भाई साहिल ने दखल दिया और उसका हाथ पकड़कर जबरन उसे कार के भीतर बैठाया। गाड़ी जैसे ही पुणे से रवाना होकर रावेत (पिंपरी चिंचवाड़) के पास पहुंची, कार के अंदर का माहौल और भी ज्यादा गर्म हो गया। सिया और उसके भाई साहिल के बीच बेहद तीखी बहस और लड़ाई होने लगी। सिया बार-बार इस सफर को रोकने की जिद कर रही थी, जबकि केतन और उसके परिजन उसे समझाने की कोशिश में जुटे थे।
फूड कोर्ट का वो बहाना और चुपके से चोरी हुआ पासपोर्ट
रास्ते के इस तनाव के बीच, यह काफिला मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर स्थित एक फूड कोर्ट में चाय-नाश्ते के लिए रुका। सभी लोग गाड़ी से उतरकर रिफ्रेशमेंट के लिए चले गए, लेकिन सिया के दिमाग में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। ड्राइवर वैभव ने बताया कि नाश्ते के दौरान सिया अचानक किसी चीज का बहाना बनाकर अकेली वापस कार के पास आई। उसने गाड़ी का दरवाजा खोला और बेहद चालाकी से केतन के बैग में हाथ डालकर उसका पासपोर्ट और कुछ अन्य जरूरी सामान निकाल लिया। सिया ने फुर्ती से उस सामान को अपनी जेब में छुपाया और वापस चली गई। वैभव ने अपनी सीट पर बैठे-बैठे सिया की इस पूरी हरकत को साफ़ देख लिया था, लेकिन उस वक्त वह समझ नहीं पाया कि सिया अपने ही मंगेतर का पासपोर्ट इस तरह चुपके से क्यों चुरा रही है।
एयरपोर्ट पर वो आखिरी कॉल और साज़िश का आखिरी सिरा
कुछ घंटों के सफर के बाद ड्राइवर ने केतन, सिया और उनके परिजनों को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित ड्रॉप कर दिया। लेकिन कहानी में असली सस्पेंस तब आया जब सभी को छोड़ने के कुछ देर बाद ही ड्राइवर वैभव के फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर केतन अग्रवाल का नाम था। केतन ने घबराए हुए लहजे में ड्राइवर से कहा, “भैया, मेरा पासपोर्ट नहीं मिल रहा है, शायद जल्दबाजी में कार की सीट या नीचे गिर गया है, प्लीज एक बार चेक करो।” वैभव को यह बात अच्छी तरह पता थी कि केतन का पासपोर्ट कार में गिरा नहीं है, बल्कि उसे तो सिया ने फूड कोर्ट पर ही गायब कर दिया था। पुलिस अब ड्राइवर के इस बयान को इस हत्याकांड की सबसे मजबूत कड़ी मान रही है, जिससे यह साफ होता है कि केतन की हत्या की स्क्रिप्ट एयरपोर्ट पहुंचने से पहले ही लिखी जा चुकी थी।
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